बेटे के न होने से वह दोनों अकेले पड़ गए
बोले-उन्हें बेटे के पैसे नहीं चाहिए, बस उसका साथ चाहिए। बेटे के न होने से वह दोनों अकेले पड़ गए हैं। बुजुर्ग पिता ने कहा कि वह सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हैं। संजौली क्षेत्र में अपना मकान है। बेटे को शिमला के अच्छे स्कूल में पढ़ाई करवाई। फिर बड़े संस्थान से प्रोफेशनल कोर्स भी करवाया। इसे अमेरिका भेजा ताकि अपनी पसंद की नौकरी कर सके। बेटा अमेरिका चला गया। पहले तो सब कुछ ठीक रहा लेकिन फिर धीरे-धीरे बात कम होने लगी।
अब बेटा शिमला नहीं आ रहा
बेटे ने अपनी पसंद की लड़की से वहां शादी भी कर ली। अब बेटा शिमला नहीं आ रहा। इंतजार करते हुए तीन साल हो गए हैं। हाल चाल जानने के लिए अब फोन तक नहीं करता। माता-पिता फोन करते हैं तो बेटा समय न होने की बात कहकर कई बार फोन काट देता है। बोले-उन्हें बेटे के पैसे नहीं चाहिए, बस उसका साथ चाहिए। बेटे के न होने से वह दोनों अकेले पड़ गए हैं।
दोस्तों-परिजनों से मिलें, उनसे बात करें : एडीएम
उपायुक्त कार्यालय के परामर्श केंद्र में डॉक्टर ने बुजुर्ग दंपत्ती से बात की। कहा कि अकेलापन दूर करना जरूरी है। एडीएम ज्योति राणा ने कहा कि तनाव न लें और अपने पुराने मित्रों, परिजनों से बात करें। उनके पास जाएं और मेल-मिलाप करें। चाहे तो शहर में बने डे केयर सेंटर में जाकर दूसरे बुुजुर्गाें से मिले और किसी गेम्स आदि में हिस्सा लें। एडीएम ने कहा कि परामर्श केंद्र में इस तरह का यह पहला मामला आया है।
बुजुर्गाें का शहर बन रहा शिमला
राजधानी में बुजुर्गाें के अकेले रहने का यह पहला मामला नहीं है। शहर में सैकड़ों बुजुर्ग दंपत्ति ऐसे हैं जो अब अकेले रहते हैं। इनके बच्चे विदेश में बस गए हैं। मजबूरन कई बुजुर्गाें को देखरेख के लिए केयरटेकर रखने पड़े हैं। जाखू में कुछ साल पहले एक बुजुर्ग कर्मी की मौत हो गई थी। यह शिमला में अकेला रहता था जबकि बच्चे विदेश में रहते थे। इसकी मौत का पता भी लोगों को तब लगा जब भीतर से बंद घर से शव सड़ने की बदबू आने लगी। शहर में अकेले रहने वाले कई बुजुर्गाें ने महापौर सुरेंद्र चौहान से उनके लिए खलीनी और संजौली में डे केयर सेंटर खुलवाए हैं।