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Shimla News: अंग्रेजों की बनाई सबसे पुरानी ढली टनल का होगा जीर्णाेद्धार

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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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साल 1852 में बनी पुरानी ढली टनल होगी बंद
टनल के जीर्णोद्धार का कार्य होगा शुरू
पुरानी टनल की दीवारों से रिस रहा पानी
एचपीआरआईडीसी को सौंपी गई रिपोर्ट
अशोक चौहान
शिमला। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1852 में बनी राजधानी शिमला की सबसे पुरानी ढली टनल अब आवाजाही के लिए बंद कर दी जाएगी।
नई डबल लेन टनल खुलने के बाद 171 साल पुरानी ढली टनल के जीर्णोद्धार का फैसला लिया है। अगले साल इस टनल के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू करने की योजना है। इसके लिए पुरानी टनल का एक नामी कंपनी से सर्वेक्षण भी करवा लिया है। इस कंपनी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर एचपीआरआईडीसी को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार टनल के भीतर किस तरह के काम होना जरूरी है, इसके बारे में सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर कब और कैसे काम शुरू करवाना है, इसका फैसला एचपीआरआईडीसी को करना है। विशेषज्ञों के अनुसार ढली की पुरानी टनल में दीवारों से लगातार पानी रिस रहा है। पानी के साथ मिट्टी भी टनल के भीतर पहुंच रही है। दशकों पुरानी होने के कारण यह जर्जर हालत में है। हालांकि, इसे मजबूती देकर फिर से वाहनों की आवाजाही के लिए चलाया जा सकता है। इसीलिए इसका जीर्णोद्धार करवाने की योजना है। काम पूरा होने के बाद इसे खोल दिया जाएगा।
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मेजर ब्रिग्स ने बनवाई थी ढली टनल
संजौली को ऊपरी शिमला से जोड़ने के लिए ब्रिटिश शासनकाल के दौरान मेजर ब्रिग्स ने इस टनल का काम शुरू करवाया था। साल 1850 में इसका निर्माण शुरू हुआ था जो 1852 में विंटर सीजन के दौरान पूरा हुआ। वर्तमान टनल सिंगल लेन थी जिसके चलते एक समय में एक तरफ से ही वाहनों की आवाजाही होती थी। नई टनल में दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही होगी। एचपीआरआईडीसी के अधीक्षण अभियंता महेश राणा ने कहा कि नई टनल खुलने के बाद अब पुरानी टनल का जीर्णोद्धार होना है। इस बारे में कंपनी की सर्वे रिपोर्ट भी आ गई है।
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