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देश की पहली डिजिटल विधानसभा हिमाचल में

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हमारे लिए यह गौरव का विषय है कि हिमाचल प्रदेश की विधानसभा देश की प्रथम डिजिटल विधानसभा बन गई है तथा हमारी विधानसभा उच्च तकनीकयुक्त हो गई है और यहां ई-विधान प्रणाली स्थापित कर दी गई है।
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मुख्यमंत्री को विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने सदन में आमंत्रित किया था, ताकि वे विधानसभा की अपनाई गई आधुनिक डिजिटल ऑनलाइन प्रणाली से रूबरू हो सकें। मानसून सत्र से हिमाचल विधानसभा पूरी तरह पेपर लेस हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने जताई खुशी

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय आ गया है कि तेजी से बदलते विश्व के साथ कदमताल करने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीक अपनाई और सीखी जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में स्वर्ण जयंती समारोह मनाने के साथ-साथ प्रदेश विधानसभा में वर्ष 1925 में भारतीय महिलाओं को मताधिकार प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय यहीं लिया गया था। तब पंडित मोतीलाल नेहरू ने इस संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत किया था और लाला लाजपत राय ने इसका समर्थन किया था।

इस प्रस्ताव को सदन ने सर्वसम्मति से पारित किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र पूरी तरह डिजिटल होगा और इस दौरान सदन में कागजरहित कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान मंत्रियों तथा सचिवों के मध्य संचार भी ऑनलाइन होगा और वीडियो कांफ्रेंसिंग, डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग और वेब स्ट्रीमिंग की सुविधाएं भी उपलब्ध होगी।
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टच स्क्रीन से होगी वोटिंग और रिकॉ‌र्डिंग

विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल ने मुख्यमंत्री को बताया कि ई-विधान प्रोजेक्ट को 8.12 करोड़ रुपये से स्थापित किया जा रहा है। एनआईसीएसआई नई दिल्ली को इसके कार्यान्वयन के लिए तकनीकी एजेंसी बनाया गया है।

इस प्रणाली में आवश्यकता पड़ने पर टच स्क्रीन के माध्यम से ई-वोटिंग और किसी कार्य के आरंभ एवं अंत समय तथा विचार विमर्श के दौरान सदस्यों की डिजिटल रिकॉडिंग की सुविधा है। जानकारी सदन में एलईडी के माध्यम से तथा सदस्यों की सीटों पर लगे लैपटॉप पर प्रदर्शित होगी। कुल 73 लैपटॉप लगाए गए हैं।
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