एसडीए, टुटू और ऑकलैंड में स्मार्ट सिटी से बनी पार्किंग के हो चुके हैं उद्घाटन, संचालन को लेकर चल रहा है विवाद
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महापौर चौहान ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखा पक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। संचालन को लेकर विवादों में घिरी राजधानी की स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बनी नई पार्किंग अब नगर निगम चलाने की तैयारी कर रहा है। इन पार्किंग में वाहन खड़े करने के लिए लोगों से शुल्क लिया जाएगा। नगर निगम ने इनके संचालन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शहर की अन्य पार्किंग की तर्ज पर इनसे भी शुल्क लिया जाएगा। शहर के एसडीए परिसर कसुम्पटी, ऑकलैंड और टुटू में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण हो चुका है। इनका उद्घाटन भी किया जा चुका है, लेकिन संचालन को लेकर विवाद चल रहा है। फिलहाल यह पार्किंग खुली हैं और लोग इनमें बिना शुल्क वाहन खड़े कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने इनके संचालन के लिए टेंडर किए हैं। इससे जुड़ा मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। वहीं नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रबंधन की ओर से इन पार्किंग के संचालन पर आपत्ति जताई है। महापौर सुरेंद्र चौहान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष भी इस मामले पर अपना पक्ष रख चुके हैं। महापौर के अनुसार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बनाई गईं सभी पार्किंग नगर निगम को सौंपी जानी हैं। ऐसे में इनके संचालन के लिए ठेकेदार के साथ होने वाले एमओयू भी नगर निगम के साथ होने चाहिए। अभी किए टेंडर में इस व्यवस्था को लागू नहीं किया है।
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महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि जब तक विवाद का समाधान नहीं होता, तब तक नगर निगम इन पार्किंग का संचालन कर सकता है। जनता को पार्किंग की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए इन्हें चलाना जरूरी है। पार्किंग का आवंटन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर भी किया जा सकता है। इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा।
सब कमेटी ने पार्किंग पर निगम से मांगी रिपोर्ट
कैबिनेट सब कमेटी की बैठक सोमवार को प्रदेश सचिवालय में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में शहर में पीपीपी मोड पर बनी पार्किंग के मुद्दे पर चर्चा की गई। नगर निगम की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। इसमें लिफ्ट और छोटा शिमला में तैयार की गई पार्किंग को लेकर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी गई। सब कमेटी ने नगर निगम को निर्देश दिए कि 20 अगस्त को होने वाली आगामी बैठक में पार्किंग के अधिग्रहण से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी रिपोर्ट पेश की जाए। सूत्रों के अनुसार यदि पार्किंग से जुड़ा समझौता समाप्त होता है तो सरकार या नगर निगम को इनके अधिग्रहण के लिए कितनी राशि की जरूरत होगी, इस पर भी रिपोर्ट देने को कहा है।