अदालत ने कुछ समय के बाद इस मामले को सुनने के लिए रखा। बोर्ड की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को पार्टी बनाने के लिए आवेदन दायर कर दिया है। उन्होंने याचिका में मांग की है कि एक तो निचली अदालतों के फैसले पर रोक लगा दी जाए और दूसरी वक्त बोर्ड के कानून को रद्द किया जाए।
वहीं नगर निगम की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि इस तरह की मांगों को लेकर दायर याचिका सुनने योग्य नहीं है। इन दोनों का क्षेत्राधिकार अलग-अलग है। अब इस याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सोमवार को सुनवाई होगी। 30 अक्तूबर को जिला अदालत ने शिमला नगर निगम आयुक्त के 3 मई 2025 के उन आदेशों को सही ठहराया। इसमें निगम आयुक्त ने पूरी मस्जिद को अवैध बताते हुए पूरा ढांचा हटाने के आदेश दिए थे। इन आदेशों को वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत में चुनौती दी। जिला अदालत ने सुनवाई के दौरान निगम आयुक्त के आदेशों को सही ठहराया और 30 दिसंबर तक अवैध ढांचे को गिराने के निर्देश दिए।
मस्जिद में नमाज पढ़ने पर एतराज, पुलिस में दी शिकायत
संजौली की विवादित मस्जिद में शुक्रवार को कुछ लोगों के नमाज पढ़ने के बाद हिंदू संघर्ष समिति ने पुलिस को इसकी लिखित शिकायत दी है। जानकारी के अनुसार संजौली मस्जिद में मस्जिद कमेटी ने सभी को नमाज पढ़ने के लिए इन्कार किया था। मनाही के बावजूद कुछ लोगों ने यहां पर नमाज पढ़ी। इस पर हिंदू संघर्ष समिति के मदन ठाकुर, विजय शर्मा, विकास थापटा और रजनीश शर्मा ने पुलिस काे दी शिकायत में कहा कि मनाही के बावजूद रियासत अली नाम का एक व्यक्ति अपने साथ कुछ लाेगाें काे नमाज पढ़ने के लिए ले गया। इससे नियमों का उल्लंघन हुआ है। उनका कहना है कि शुक्रवार को जुमे की नमाज का दिन होने के बावजूद संजौली मस्जिद के मौलवी शहजाद ने नमाज अता कराने से मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह नमाज नहीं पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग मस्जिद में पहुंचे। रियासत अली नामक एक व्यक्ति ने मस्जिद में नमाज अता की और कहा कि नमाज पढ़ना उनका फर्ज है और उन्हें इससे कोई नहीं रोक सकता।
पांच मंजिला मस्जिद की तोड़ी जा चुकी हैं दो मंजिलें
नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने पहले ऊपर की तीन मंजिल गिराने का आदेश दिया था। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने दो मंजिलों को तोड़ दिया था, जबकि एक मंजिल नहीं तोड़ी गई थी। इसके बाद नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने निचली दो मंजिलों को भी अवैध करार दे दिया था।
दो गुटों में लड़ाई के बाद सुर्खियों में आया मामला
संजौली मस्जिद मामला करीब 16 साल तक नगर निगम आयुक्त कोर्ट में चलता रहा। इस दौरान 50 से भी ज्यादा बार इस केस पर सुनवाई हुई। 31 अगस्त 2024 को शिमला के मैहली में दो गुटों में मारपीट के बाद से मस्जिद विवाद गरमाया। 5 सितंबर 2024 को शिमला में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया। 11 सितंबर को संजौली-ढली में उग्र प्रदर्शन किया गया। इस बीच 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी खुद निगम आयुक्त कोर्ट पहुंची और खुद ही मस्जिद का अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की। हालांकि, 3 मई को एमसी आयुक्त कोर्ट ने इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय ले लिया था। अब जिला अदालत ने भी इस फैसले पर मुहर लगाई है।
संजौली मस्जिद मामले में कब क्या हुआ?
- संजौली मस्जिद मामले में 50 से ज्यादा बार सुनवाई हुई।
- 31 अगस्त 2024 को मैहली में दो गुटों में मारपीट के बाद मस्जिद विवाद गरमाया।
- 1 और 5 सितंबर 2024 को शिमला में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन शुरू किया।
- 11 सितंबर को संजौली-ढली में उग्र प्रदर्शन हुआ।
- 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी आयुक्त कोर्ट में पहुंची
- 5 अक्तूबर 2024 को आयुक्त कोर्ट ने तीन मंजिलों को हटाने की अनुमति दी
- 30 नवंबर 2024 को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने याचिका खारिज कर दी
- 3 मई 2025 को एमसी आयुक्त कोर्ट ने दो और मंजिलों को हटाने का आदेश दिया
- वक्फ बोर्ड ने 17 मई को 3 मई के आदेशों को जिला न्यायालय में चुनौती दी
- 19 मई को सुनवाई में अदालत ने मस्जिद कमेटी से रिकॉर्ड तलब किया
- 23 मई को एमसी को दोबारा नोटिस जारी कर रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा
- 26 मई की सुनवाई में कोर्ट ने मस्जिद तोड़ने पर अंतरिम रोक लगाई।
- 29 मई को अदालत ने स्टे को बरकरार रखा
- 11 जुलाई को केस को बहस योग्य माना गया
- 8 और 21 अगस्त को वक्फ बोर्ड ने बहस के लिए समय मांगा
- 6 सितंबर को करीब सवा दो घंटे तक बहस हुई
- 30 अक्तूबर के लिए मामला सूचीबद्ध किया और फैसला सुनाया
- 28 नवंबर को जिला अदालत, एमसी आयुक्त कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर