धर्मशाला से लौटे आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत
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आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत अपने चार दिन के कांगड़ा प्रवास के दौरान हिमाचल प्रदेश में संघ की जड़ें मजबूत करने के साथ पड़ोसी देश चीन को सख्त संदेश दे गए। धर्मगुरु दलाईलामा से मिलने के एक दिन पहले भागवत ने निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग और कुछ सांसदों को कांगड़ा में विशेष चर्चा के लिए बुलाया। इसमें तिब्बत मसले के हल को लेकर गहन चर्चा हुई। इससे अगले दिन सोमवार को भागवत ने सुबह धर्मगुरु दलाईलामा से 35 मिनट तक मुलाकात कर चीन को सख्त संदेश दिया।
भागवत और दलाईलामा की मुलाकात को पड़ोसी देश के साथ कूटनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भागवत ने दलाईलामा के साथ धार्मिक सद्भावना और तिब्बत मसले पर बातचीत की। कांगड़ा आकर चीन को सख्त संदेश देने के साथ भागवत ने यह भी बताने की कोशिश की कि संघ कोई कट्टरवादी संगठन नहीं है। लोग बिना जाने संघ के बारे में गलत धारणा न बनाएं। भागवत ने हिमाचल के कई वर्गों और बुद्धिजीवियों को आरएसएस के एजेंडे और विचारधारा को बारीकी से समझाने का प्रयास किया।
आरएसएस प्रमुख ने तर्कों के साथ समझाने का प्रयास किया कि संघ सिर्फ राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित है। यह जातपात और धार्मिक कट्टरवाद में विश्वास नहीं रखता। कांगड़ा प्रवास के दौरान भागवत ने परोक्ष रूप से चीन, पाकिस्तान और कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने इस दौरान प्रचारकों और स्वयंसेवकों के साथ मैराथन बैठकें कर उनको चार साल का रोडमैप दिया। स्वयंसेवकों को बताया गया कि उनको संघ की जड़ें हिमाचल में और गहरी कैसे करनी हैं। प्रचारकों को पंचायत स्तर पर अपनी जड़ें मजबूत करने का मंत्र दिया। पूर्व सैनिकों के परिवारों को भी संघ की विचारधारा समझाई।