सदन से पहले पार्षदों को मनाने के लिए होटल होलीडे होम में रखा था लंच, मेयर ने खुद कॉल कर बुलाए सभी कांग्रेस पार्षद
नाराज पार्षद बोले, पहले ही साथ लेकर चलते तो परेशानी न होती अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राजधानी में मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल बढ़ाने पर मचा सियासी घमासान जो मुख्यमंत्री से लेकर दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान तक पहुंच गया था आखिरकार शुक्रवार को मटन और गजरेले के स्वाद के साथ खत्म हो गया।
नगर निगम सदन से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को महापौर सुरेंद्र चौहान ने सभी कांग्रेस पार्षदों को लंच पर बुलाकर बातचीत के लिए मना लिया। एक घंटे चली बैठक के बाद महापौर ने दावा किया कि सभी पार्षदों के गिले-शिकवे दूर हो गए हैं। अब सभी एकजुट हैं। उधर ज्यादातर नाराज पार्षदों ने भी अब महापौर का साथ देने की बात कही है। हालांकि कोर्ट में चल रही सुनवाई पर भी इनकी नजरें टिकी हुई हैं। मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल करने के सरकार के फैसले से कांग्रेस के 15 पार्षद नाराज चल रहे थे। इन्होंने हस्ताक्षर किया अपना एक मांगपत्र विधायक समेत मुख्यमंत्री और पार्टी आलाकमान तक भेज दिया था। इनका कहना था कि रोस्टर के अनुसार अब महिला पार्षद को मेयर पद पर तैनाती दी जाए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी कुछ दिन पहले ओकओवर में बैठक बुलाकर इनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की थी। हालांकि, पार्षद मानने को तैयार नहीं हो रहे थे। यह मेयर की बैठकों और अन्य कार्यक्रमों का भी बहिष्कार कर रहे थे। इसके बाद महापौर सुरेंद्र चौहान ने खुद इन्हें मनाने के लिए पहल की।
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मेयर ने खुद कॉल कर बुलाया, तैयार हुए पार्षद महापौर सुरेंद्र चौहान ने खुद सभी पार्षदों को कॉल कर लंच पर बुलाया। उन्होंने कहा कि मिल बैठकर सबकी बात सुनी जाएगी। इस पर पार्षद तैयार हो गए। महापौर ने कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा के घर जाकर उनसे भी वीरवार को लंबी बात की थी। महापौर के बुलावे पर शुक्रवार को पहली बार सभी पार्षद बैठक में आने के लिए तैयार हो गए। यहां पहले पार्षदों के तेवर तल्ख दिखे। कुछ पार्षदों ने कहा कि रोस्टर के अनुसार महिला को मेयर पद पर मौका मिलना चाहिए था। मेयर से कहा कि आपने सभी पार्षदों को साथ बिठाकर कभी उनसे बात नहीं की कि आगे किसे मौका मिलना चाहिए। पार्षदों ने कहा कि यदि पहले ही इस तरह की बैठक बुलाते तो यह विवाद न होता। महापौर ने भी माना कि उनसे गलती हुई लेकिन साथ ही कहा कि उन्होंने काम में कभी भेदभाव नहीं किया। भरोसा दिया कि उनके वार्डाें के कोई काम नहीं रुकेंगे। पार्षद बोले कि काम तो होते रहेंगे लेकिन सभी को बराबर मान सम्मान मिलना चाहिए। आखिर में नाराज पार्षद नरम पड़ गए और महापौर और उप महापौर को बढ़े हुए कार्यकाल की बधाई दी। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में विवाद थमता है या नहीं।
मटन, मटर पनीर से लेकर गजरेले ने मिटाई दूरियां
लंच में पार्षदों की पसंद का खाना तैयार किया था। खाने में मटर पनीर, मटर मशरूम, मटन, दाल से लेकर गजरेला तक का इंतजाम किया गया था। लंच के बाद सभी पार्षदों ने महापौर सुरेंद्र चौहान और उपमहापौर उमा कौशल के साथ फोटो भी खिंचवाई और साथ होने का दावा किया। इस लंच में पार्षद सिमी नंदा, नरेंद्र ठाकुर, उर्मिला कश्यप, चमन प्रकाश, उमंग बांगा, किरण शर्मा, शांता वर्मा, शीनम कटारिया, विशाखा मोदी, रचना भारद्वाज, मोनिका भारद्वाज, अतुल गौतम, आरआर वर्मा, दलीप थापा, आलोक पठानिया, विनीत शर्मा, कुलदीप ठाकुर, मनोनीत पार्षद गीतांजलि भागड़ा, राजकुमार शर्मा, अश्वनी सूद और विनोद भाटिया पहुंचे। पार्षद कांता सुयाल, सुषमा कुठियाला, अंकुश वर्मा, अनिता शर्मा निजी कारणों से नहीं पहुंच पाए।