इस दौरान विक्रम की मां सुनीता और परिजनों के अलावा जेल पुलिस अधीक्षक सुशील ठाकुर, उप अधीक्षक जेल भानु प्रकाश और चमन लाल भी मौजूद रहे। किताब के विमोचन के दौरान विक्रम ने कहा कि उसे शुरू से ही कानून पर पूरा भरोसा था। लिहाजा एक न एक दिन जेल से बाहर निकलने की सोच रखते हुए जेल में ही पढ़ाई जारी रखी। निर्दोष होने के बावजूद भले ही वह जेल में रहा, लेकिन उसने अपना भविष्य कालकोठरी में बर्बाद नहीं किया। जेल में की हुई मेहनत अब काम आ रही है। वह यूपीएससी की तैयारी करूंगा।