ताकि बड़ी मात्रा में जल संग्रह किया जा सके और उस पानी का इस्तेमाल पानी की कमी के दौरान गर्मियों के महीनों में किया जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे के अलावा यह भी जानना जरूरी है कि क्या शिमला शहर में होने वाले नए निर्माणों को स्वीकृति प्रदान की जा सकती है।
विशेषता तब जब शिमला नगर निगम की परिधि में उसका अपना कोई स्थाई पानी का साधन नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि क्या दूरदराज से नदी के माध्यम से पंप द्वारा पानी उठाया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि इस विषय पर भी विचार करना आवश्यक है कि क्या शिमला में बढ़ती जनसंख्या को पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध करवाने के लिए पानी का संग्रह करने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध है या नहीं।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन के वकीलों ने शिमला में पानी के असमान वितरण पर रोष स्वरूप सोमवार को अदालतों का बहिष्कार किया। जिला बार एसोसिएशन शिमला ने भी पानी की कमी से जूझ रही स्थानीय जनता के साथ खड़े रहते हुए अदालतों का बहिष्कार किया।
हाईकोर्ट व ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन के सदस्यों ने सरकार व नगर निगम शिमला से अपील की कि शिमला शहर में पानी के वितरण को दुरुस्त कर सभी लोगों को पर्याप्त पानी मुहैया कराएं। वकीलों ने निर्णय लिया है कि
यदि पानी के वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो उन्हें आने वाले दिनों में अदालतों के बहिष्कार के निर्णय को बढ़ाने पर फैसला लेना पड़ेगा। सोमवार सुबह साढ़े 9 बजे हाईकोर्ट में वकीलों ने आपातकालीन बैठक की, इसमें सोमवार को अदालतों के बहिष्कार का निर्णय लिया।