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Shimla News: सीवरेज नेटवर्क को प्लांट से जोड़ने की समय सीमा तय करे सरकार

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अश्वनी खड्ड प्रदूषण मामले में एनजीटी ने दिए निर्देश, 12 फरवरी से पहले सौंपनी होगी रिपोर्ट
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चिह्नित 15 प्लांटों में से अभी 14 ही हैं संचालित
एक्सक्लूसिव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश की प्रदूषित खड्डों में शुमार अश्वनी खड्ड से जुड़े मामले में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने राज्य सरकार से शेष सीवरेज नेटवर्क को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने की स्पष्ट समय सीमा प्रस्तुत करने कहा है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने यह निर्देश दिए हैं जिसकी रिपोर्ट 12 फरवरी तक सरकार को सौंपनी है।

जल शक्ति विभाग की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि राज्य में चिह्नित 15 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में से अभी 14 ही संचालित हैं। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के अधीन पंडोह स्थित एक एसटीपी अभी भी गैर-संचालित है। इन 15 एसटीपी में से 3 शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड, 9 जल शक्ति विभाग, 2 भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड और एक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट बद्दी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के नियंत्रण में है। अधिकरण को यह भी बताया गया कि स्वीकृत परियोजना रिपोर्टों के अनुसार 748.55 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क प्रस्तावित था। इनमें से 724.74 किलोमीटर नेटवर्क जमीन पर बिछाया जा चुका है लेकिन केवल 628.33 किलोमीटर नेटवर्क ही संबंधित एसटीपी से जुड़ा है। शेष 96.41 किलोमीटर सीवरेज लाइन अब भी कनेक्टिविटी से बाहर है, जिसके कारण गंदा पानी नालों और जल स्रोतों में प्रवाहित हो रहा है।
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जल शक्ति विभाग की मुख्य अभियंता अंजू शर्मा ने सुनवाई के दौरान बताया कि सीवरेज नेटवर्क कनेक्टिविटी का 88 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और 12 प्रतिशत कार्य शेष है। शेष कार्य पूरा करने और उसकी समय सीमा प्रस्तुत करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा। इसे एनजीटी ने स्वीकार कर लिया। इस संबंध में कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अवगत कराया कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली के लिए शिमला, मंडी और सोलन जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजे हैं। डिफाल्टर इकाइयों से यह राशि भू-राजस्व की तरह वसूली जानी है। इस प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट भी छह सप्ताह में प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को तय की गई है।
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ऐसे उठा अश्वनी खड्ड प्रदूषण का मामला
अश्वनी खड्ड प्रदूषण का मुद्दा वर्ष 2023 में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद सामने आया था। इसमें अश्वनी खड्ड को हिमाचल की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में शामिल बताया गया था। रिपोर्ट में बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले औद्योगिक अपशिष्ट, अधूरे सीवरेज नेटवर्क और अपर्याप्त ट्रीटमेंट की ओर ध्यान दिलाया था। इसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में सामने आया कि कई स्थानों पर एसटीपी की स्थापित क्षमता और वास्तविक सीवेज प्रवाह के बीच बड़ा अंतर है। एनजीटी ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से समयबद्ध सुधार की मांग की थी।
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