प्रदेश सरकार पर लगाए आरक्षण समाप्त करने की साजिश रचने के आरोप
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पटवारी भर्ती के लिए वसूली जा रही आठ सौ रुपये फीस
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शोषण मुक्ति मंच ने पटवारी भर्ती के लिए शुरू की गई आवेदन प्रक्रिया में आरक्षित और गरीब वर्ग के अभ्यर्थियों को फीस में कोई छूट न देने पर रोष व्यक्त किया है। मंच का आरोप है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में फीस में छूट न देकर आरक्षण को समाप्त करने की साजिश रच रही है।
यह पहला कदम उठाया गया है, इस पर मंच ने आपत्ति जताई है। राजधानी में मंगलवार को हुई शोषण मुक्ति मंच की राज्य कमेटी की बैठक में गोपाल जिलटा, जगत राम, प्रीतपाल मट्टू, कर्म चंद भाटिया, सतपाल मान, नैन सिंह, संदीप भारती, कमल, राजबन नेगी, इंद्र सिंह, मथरादास, उजागर, नेक राम और तिलक राज सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि हर वर्ग के लिए 800 रुपये की आवेदन फीस तय की है। ऐसा कर आर्थिक रूप से कमजोर और आरक्षित वर्ग के परीक्षार्थियों को हतोत्साहित करने का कार्य किया गया है। यह सामाजिक न्याय और आरक्षण की भावना के खिलाफ है।
राज्य संयोजक आशीष कुमार ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार आरक्षण व्यवस्था को धीरे–धीरे खत्म करने का प्रयास कर हरी है। फीस में रियायत न देना इसका प्रमाण है। आर्थिक रूप से कमजोर आरक्षित वर्ग से संबंधित और संसाधनों की कमी झेल रहे अभ्यर्थियों से आवेदन की फीस वसूली जा रही है, यह लोगों के अधिकारों पर हमला है। बैठक में निर्णय हुआ कि मंच का पंचायत स्तर पर गठन किया जाएगा। जमीनी स्तर पर सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती दी जाएगी। मंच के पदाधिकारियों ने सरकार से सभी सरकारी विभागों की भर्तियों आउटसोर्स, वन मित्र, पशु मित्र, श्रमिक मित्र जैसी योजनाओं के तहत होने वाली भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर को सख्ती से लागू करने की मांग की। मंच ने चेताया कि यदि सरकार फीस वसूलने के इस निर्णय को वापस नहीं लेती, तो आंदोलन किया जाएगा।