स्वयंभू शिवलिंग पर मक्खन से सातवां स्वरूप गढ़धनोरा महादेव केशकाल छत्तीसगढ़ का उकेरा गया। गढ़धनोरा ऐतिहासिक धार्मिक स्थल छत्तीसगढ़ के केशकाल में स्थित है।
बाबा भूतनाथ मंदिर में गुरुवार को स्वयंभू शिवलिंग पर मक्खन से सातवां स्वरूप गढ़धनोरा महादेव केशकाल छत्तीसगढ़ का उकेरा गया। गढ़धनोरा ऐतिहासिक धार्मिक स्थल छत्तीसगढ़ के केशकाल में स्थित है। धनोरा को कर्ण की राजधानी कहा जाता है। गढ़धनोरा में 5वीं और 6वीं सदी की प्राचीन मंदिर विष्णु व अन्य मूर्तियों सहित बावड़ी मिली है। यहां केशकाल टिलों की खुदाई पर अनेक शिव मंदिर मिले हैं। यहां एक टीले पर कई शिवलिंग हैं। जो गोवरहीन के नाम से प्रसिद्ध। यहां पर महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला लगता है।
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इसी तरह केशकाल की पवित्र पुरातात्विक भूमि में अनेक स्थल हैं जो न केवल प्राचीन इतिहास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं बल्कि श्रद्धा एवं आस्था के अद्भुत केंद्र हैं। इनमें नारना में अद्भुत शिवलिंग तथा पिपरा के जोड़ा शिवलिंग की बड़ी मान्यता है। यहां पहुंचकर भक्त बौघड़वरदानी भोले शंकर के अभय अलौकिक शिवलिंग का दर्शन करते हैं। यहां की निर्माण कला नलवंशी नागवंशी काल की निर्माण कला से मेले खाती है। मान्यता है कि किसी महादेव शिव भक्त रघुवंशी नागवंशी राजा महाराजा के द्वारा ही यहां पर इस गढ़धनोरा मंदिर की स्थापना करने के आद अन्य मंदिरों एवं तालाबों का निर्माण कराया गया है।