पित्त की नली में फंसी पथरी निकालने में होगी आसानी अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी (एआईएमएसएस) चमियाना में एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेंजियोपैन्क्रिएटोग्राफी (ईआरसीपी) मशीन से पित्त की नली में फंसी पथरी निकालने के ऑपरेशन शुरू होंगे। इस प्रक्रिया के बाद मरीजों को 24 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी मिल सकेगी।
गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने मशीन के माध्यम से ऑपरेशन कर सफल ट्रायल किया है। अब विभाग की ओर से मशीन की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। इससे पित्त की नली में फंसी जटिल पथरी को निकालने में आसानी होगी। इससे पहले अस्पताल में पथरी निकालने के लिए ऑपरेशन किए जाते थे। पित्त की नली में फंसी बड़ी पथरी को निकालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी (ईएचएल) तकनीक की मदद से बड़ी पथरी को तोड़कर निकाल सकेगा। विभाग ने हाल ही में 70 से 95 वर्ष की आयु के पांच बुजुर्ग मरीजों के ऑपरेशन किए हैं। इस दौरान पित्त की नली से 20 एमएम तक की पथरी निकाली है। इस तकनीक से जटिल मामलों में भी उपचार करना आसान हो सकेगा।
यह तकनीक होगी इस्तेमाल
इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी (ईएचएल) तकनीक का इस्तेमाल बड़ी पथरी को तोड़ने के लिए किया जाता है। इसमें विशेष उपकरण की मदद से पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है, जिससे उसे निकालना आसान हो जाता है। पित्त की नली में फंसी बड़ी पथरी के मामलों में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके इस्तेमाल से जटिल मामलों के उपचार में मदद मिलेगी।ईआरसीपी मशीन के माध्यम से पथरी निकालने की सुविधा जल्द शुरू हो जाएगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही टेंडर जारी कर मशीन स्थापित करवाई जाएगी। -डॉ. ब्रिज शर्मा, प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष