वहीं, आंदोलन का परिवहन निगम पर व्यापक असर पड़ा है। सोमवार परिवहन निगम को करीब एक करोड़ का घाटा हुआ है। हिमाचल के 28 डिपो से प्रदेश और बाहरी राज्यों के लिए बसें भेजी गई लेकिन परमाणू के आगे कोई भी बस नहीं गई। चक्का जाम की सूचना मिलने पर स्टेशन से बसें भेजनी बंद कर दी गई। आंदोलन खत्म होने के बाद सवा चार बजे से परिवहन निगम ने बाहरी राज्यों के लिए बसें भेजनी शुरू की।
परिवहन निगम साढ़े पांच सौ रूटों पर बाहरी राज्यों के लिए बसें चलता है। यह सभी रूट फायदे वाले हैं। परिवहन निगम का मानना है कि सवा चार बजे चंडीगढ़ रूट पर बस भेजी गई।इसके बाद 4:40 बजे दिल्ली के लिए बस रवाना की है। इसके बाद रूटों पर बसें की आवाजाही शुरू की गई। हिमाचल में 10 बजे तक बसें चलती रही। इसके बाद चक्का जाम होने के कारण कई बसें सड़क में ही फंसी रही। इस दौरान लोगों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ा है।
2100 रूटों पर दौड़ रही बसें
कोरोना के चलते परिवहन निगम हिमाचल और बाहरी राज्यों के करीब 21 सौ रूटों पर बसें चल रहा है। हिमाचल के कई रूट
घाटे पर चल रहे हैं जबकि कई रूट ऐसे है जो नो प्राफिट न लॉस पर चल रहे हैं। धर्मशाला, चंबा, मंडी, कांगड़ा के लॉग रूट
फायदे वाले हैं।