वहीं संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस की तैनाती भी कर दी गई है। यातायात नियंत्रित करके कड़ी निगरानी में वाहनों की आवाजाही हो रही है। गौरतलब है कि डयोड़ के पास पहाड़ी दकरने का खतरा बना हुआ है और तीन परिवारों के 21 सदस्य बेघर हो गए हैं।
लोगों ने प्रशासन के आदेशों के बाद अपने घरों को खाली कर दिया है और गोशालाओं में शरण ले ली है। गोशाला में एक तरफ पशु बंधे हैं और दूसरी तरफ इंसान रह रहे हैं। तीन घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और जमीन पर भी चौड़ी दरारें लोगों को डरा रही हैं।
यदि यह मलबा गिरता है तो फिर इन तीन परिवारों के साथ सड़क से नीचे की तरफ रह रहे लोगों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। प्रभावित गुलजार, रफीक और रजिया ने बताया कि उन्हें डर के साए में रातें काटनी पड़ रही हैं। इन्होंने प्रशासन और सरकार से इनके रहने की उचित व्यवस्था करने की गुहार लगाई है।
12 और 13 अगस्त 2017 की रात को मंडी जिला के कोटरोपी में प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा भूस्खलन हुआ था। पहाड़ी का एक बहुत बड़ा भाग कटकर जमींदोज हो गया था और 48 लोगों की जिंदगियों को लील गया था।
वैसे ही डयोड़ पहाड़ी में भी बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और पहाड़ी के दरकने से तबाही मचने की आशंका बनी हुई है। फोरलेन निर्माण के लिए की जा रही कटिंग के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। कटिंग के बाद पहाड़ी की पकड़ ढीली हो गई, जिसके चलते हल्की बारिश में ही पहाड़ी खिसकने लग गई।
पुलिस 24 घंटे रहेगी तैनात
डीसी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि यदि पहाड़ी खिसकने लगेगी तो सेंसर इसकी चेतावनी पहले ही दे देंगे और फ्लड लाईट्स रात के समय निगरानी के लिए काम आएंगी। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों को अस्थायी शेड बनाकर दिए जाएंगे, जिससे वे वहां पर सुरक्षित रह सकें। वहीं, पुलिस को भी मौके पर 24 घंटे तैनात रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।
चालक बरतें सावधानी
इस पूरे मामले से इलाके में तो दहशत है और ही साथ ही यहां से गुजरने वाले वाहन चालक भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। प्रशासन के लिए सड़क को बंद कर पाना भी संभव नहीं। क्योंकि मनाली के लिए यही एक सड़क है, जहां से सारा टूरिस्ट आवाजाही कर रहा है। फिलहाल, स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा और प्रशासन के लिए यह एक चुनौती से कम नहीं है।