पिंजरे में कैद तेंदुए का शावक।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के कनलोग के जंगल में लगाए पिंजरे से तेंदुए का शावक पकड़ा गया है। दस माह का यह शावक उसी आदमखोर मादा तेंदुआ का बताया जा रहा है जिसे वन विभाग ने बीते साल 18 नवंबर की रात कनलोग के जंगल से पकड़ा था। वन विभाग की टीम इस शावक को पकड़कर टुटीकंडी रेस्क्यू सेंटर ले गई है। यहां पहले ही इसकी मां मादा तेंदुआ और इसका एक अन्य शावक सेंटर में मौजूद है। कनलोग और डाउनडेल से बीते साल तेंदुआ दो बच्चों को उठाकर ले गया था। इसके बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए कनलोग और डाउनडेल के जंगल में पिंजरे लगा रखे हैं।
इन्हीं में से एक पिंजरे में सोमवार सुबह यह शावक देखा गया। अंदेशा जताया जा रहा है कि तीन चार दिन पहले यह पिंजरे में कैद हो गया था। लेकिन बर्फबारी के बीच नियमित चेकिंग न होने से सोमवार सुबह ही इसे देखा गया। वन विभाग का दावा है कि रविवार रात को ही यह पिंजरे में कैद हुआ था। विभाग का दावा है कि इस क्षेत्र में मादा तेंदुआ ही अपने बच्चों के साथ घूमती थी। ऐसे में यह उसी मादा का शावक है। इसके अलावा इसकी उम्र भी पकड़े गए दूसरे शावक के बराबर ही है। डीएफओ शहरी अनीता भारद्वाज ने बताया कि कनलोग में एक पिंजरे में यह शावक कैद हो गया था। इसे अब टुटीकंडी रेस्क्यू सेंटर में रखा है। यह थोड़ा कमजोर है, लेकिन स्वस्थ है।
अब तक पकड़े जा चुके तीन तेंदुए
वन विभाग करीब तीन महीने में अब तक तीन तेंदुओं को पकड़ चुका है। 17 नवंबर को कनलोग से मादा तेंदुआ पकड़ी गई थी। इसके बाद जनवरी में यूएस क्लब के पास इसके एक शावक को पकड़ा था। रिहायशी इलाके में घुसे इस शावक को लावारिस कुत्तों ने घेर लिया था। बचने के लिए यह पेड़ पर चढ़ गया। बाद में वन विभाग ने इसे बेहोश कर पकड़ा था। अब कनलोग से एक और शावक पकड़ा जा चुका है। वन विभाग के अनुसार मादा तेंदुआ के तीन शावक थे, जिनमें से दो पकड़ लिए हैं। हालांकि यह शावक इसी मादा तेंदुआ का है, इसकी आधिकारिक पुष्टि फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।