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Shimla News: आधार और आभा लिंक की शर्त ने बढ़ाया मरीजों का दर्द

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आईजीएमसी में पर्ची बनाने की नई प्रणाली से मरीजों को घंटों झेलनी पड़ रही है परेशानी
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स्मार्ट फोन नहीं तो पर्ची बनाना हो जाता है मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में ओपीडी की पर्ची बनाने के लिए आधार और आभा कार्ड का लिंक होना अनिवार्य कर दिया है। इस नए नियम के चलते ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

खासकर ऐसे बुजुर्ग जिनके पास आधार और आभा कार्ड लिंक नहीं हैं, उनकी घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी पर्ची नहीं बन रही। ग्रामीण इलाकों से आने वाले अधिकांश लोगों को पहले तो आधार-आभा लिंक की प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाजार या साइबर कैफे जाना पड़ता है। वहां से लौटने तक अस्पताल में लंबी कतारें लग जाती हैं और उनकी बारी निकल चुकी होती है। कई बार ऐसे मरीजों को अगले दिन फिर से अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है। बुजुर्ग और अनपढ़ मरीजों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है। वह न तो स्मार्ट फोन इस्तेमाल कर पाते हैं और न ही ऑनलाइन प्रक्रिया को समझते हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकार को फिलहाल पुराने तरीके से ही पर्ची बनाने की सुविधा देनी चाहिए और धीरे-धीरे सभी को लिंक प्रक्रिया से जोड़ना चाहिए। अचानक नियम बदलने से बुजुर्ग मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना सुबह-सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग बसों और टैक्सियों से पहुंचते हैं। इनमें कई लोगों को आधार कार्ड लिंक करने की जानकारी नहीं होती।
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ऐसे बदली पर्ची बनाने की प्रणाली
ओपीडी पर्ची प्रणाली में कुछ वर्षों में कई बदलाव किए हैं। पहले अस्पतालों में साधारण कागज पर हाथ से लिखकर पर्ची दी जाती थी और मरीज सिर्फ नाम तथा पता दर्ज करवाकर आसानी से जांच करवाने के लिए डॉक्टर के पास पहुंच जाते थे। इसके बाद कंप्यूटरीकृत रजिस्ट्रेशन प्रणाली शुरू हुई जिसमें पर्ची बनाने के लिए आधार कार्ड दिखाना जरूरी किया गया। इसमें सिर्फ आधार नंबर बताने से पर्ची मिल जाती थी। अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य डिजिटल मिशन के तहत आभा आईडी को अनिवार्य कर दिया है। इसे आधार से लिंक करना जरूरी कर दिया है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में मरीज की पूरी स्वास्थ्य प्रोफाइल तो दर्ज हो जाती है लेकिन मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
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