जिला स्तरीय बंजार मेले में गुच्छी की अस्थायी मार्केट में गुच्छी काफी अधिक मात्रा में आई, लेकिन किसानों को उचित दाम न मिलने से निराशा हुई। बताया जा रहा है कि गुच्छी के दाम 2017 में 8000 रुपये प्रति किलो थे। 2018 में यह बढ़कर नौ हजार तक पहुंचे थे।
2019 में चीनी गुच्छी के आगे हिमाचल की गुच्छी फीकी हो गई है। गुच्छी के व्यापारी हेमराज शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में हिमाचल की गुच्छी पर चीन में खेती से तैयार गुच्छी की मार पड़ी है।
चीन की सस्ती गुच्छी के चलते हिमाचली गुच्छी के दाम 30 फीसदी गिर गए हैं। सूबे के जंगलों में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी को दिल्ली की राष्ट्रीय मार्केट में बेचने के बाद इसे बाहरी देशों को निर्यात किया जाता है।
कुछ कंपनियां भी दवाइयां बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं। भारत से सबसे अधिक गुच्छी का निर्यात फ्रांस के लिए होता है। बताया जा रहा है कि चीन इस बार फ्रांस को गुच्छी बेच रहा है।