मुख्यमंत्री ने बताया कि ट्रांसमिशन व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जाएगा। आगामी वित्त वर्ष में प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कारपोरेशन द्वारा एडीबी ट्रांच टू तथा ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य है।
इस सुदृढ़ ट्रांसमिशन प्रणाली से 921 मेगावाट अतिरिक्त बिजली ट्रांसमिट हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल 500 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं चालू होने की संभावना है। इसमें बिजली बोर्ड की 100 मेगावाट क्षमता वाली ऊहल तृतीय चरण और पावर कारपोरेशन की 111 मेगावाट क्षमता की सावड़ा कुड्डू परियोजना शामिल है।
इन दोनों परियोजनाओं से प्रदेश में करीब 700 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली प्रति वर्ष उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कम वोल्टेज की समस्या के निदान और बेहतर विद्युत आपूर्ति के लिए बिजली बोर्ड ने 3200 करोड़ की बाह्या सहायता परियोजना तैयार की है।
इसे केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है। इस साल काजा में दो मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। हिम ऊर्जा द्वारा दस मेगावाट के ग्रिड कनेक्टिड सोलर रूफ टॉप पॉवर प्लांटस स्थापित करने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि रेणुका जी बांध परियोजना को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित किया है। इसके कार्यान्वयन के लिए हाल ही में अंतरराज्यीय समझौता हुआ है। इस परियोजना के बनने से प्रदेश को लगभग 200 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली प्राप्त होगी।
इसके अलावा चंबा में स्थित 48 मेगावाट की चांजू तीन और 30 मेगावाट की दियोथल चांजू जल विद्युत परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए बाहरी वित्त पोषित एजेंसी से 650 करोड़ रुपये के वित्त पोषण की सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हो चुकी है।
चुनावी साल में प्रदेश सरकार घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली की महंगी दरों का बोझ नहीं डालेगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने साल 2019-20 में घरेलू उपभोक्ताओं को उपदान दरों पर बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए सहर्ष 475 करोड़ रुपये का बजट देने की घोषणा की है।
इससे संभावित है कि इस साल घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। बीते साल भी सरकार ने बिजली बोर्ड को उपदान दरों पर बिजली देने के लिए 475 करोड़ का बजट दिया था। इसके चलते सरकार ने साल 2018-19 में बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं की थी।
हिमाचल के साढ़े 19 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को अप्रैल महीने से बिजली की महंगी दरों का झटका लगने की संभावना बहुत कम है। सरकार से अनुदान मिलने से बिजली बोर्ड को बड़ी राहत मिली है। 475 करोड़ के अनुदान से बोर्ड अपने घाटे को कम कर सकता है।
ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2018-19 की दरें ही साल 2019-20 में भी लागू रहेंगी। बता दें कि बीते साल हुए घाटे का हवाला देेते हुए बिजली बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग में पिटीशन दायर की है।
इसमें हालांकि दरें बढ़ाने की मांग नहीं की है, लेकिन बिजली बोर्ड का खर्च बढ़ने और बीते साल भी दरें नहीं बढ़ने की दुहाई देते हुए आर्थिक स्थिति को खराब बताया गया है।