प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती प्रश्न पत्र लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी की याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। वहीं, महिलाओं के लिए बस में 50 फीसदी किराये में छूट देने के मामले की सुनवाई आगामी 16 अगस्त को निर्धारित की गई है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती प्रश्न पत्र लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी की याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। बिहार स्थित नालंदा निवासी रंजीत कुमार ने हाईकोर्ट के समक्ष अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। इस मामले में सीआईडी की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी में पुलिस जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने इस गिरफ्तारी को अवैध करार दिए जाने की गुहार लगाई है। इस मामले को न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। दलील दी गई कि आरोपी का पुलिस भर्ती में हुए प्रश्न पत्र लीक मामले में कोई हाथ नहीं है। उसे पुलिस ने बेवजह गिरफ्तार किया है। अदालत से गुहार लगाई गई है कि आरोपी के लिए सीआईडी की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द किया जाए। आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध करार दिए जाने की गुहार भी लगाई गई है। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि कांगड़ा पुलिस ने पुलिस भर्ती मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ था कि इस मामले के तार प्रदेश के दूसरे जिलों से भी जुड़े हुए हैं। कांगड़ा पुलिस का दूसरे जिलों में क्षेत्राधिकार न होने के कारण यह मामला सीआईडी को भेजा गया। सीआईडी की ओर से इस मामले में अलग से प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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वहीं, महिलाओं के लिए बस में 50 फीसदी किराये में छूट देने के मामले की सुनवाई आगामी 16 अगस्त को निर्धारित की गई है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को सूचीबद्ध किया गया था। सचिव परिवहन और निदेशक परिवहन ने इस मामले में शपथपत्र दायर किया है। अदालत को अवगत करवाया गया कि महिलाओं को बस किराये में छूट देने का निर्णय कैबिनेट का है। महिलाओं को बस किराये में छूट देने के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम की ओर से राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने महिलाओं को बस किराये में छूट देने का निर्णय लिया। निजी बस ऑपरेटर संघ ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की ओर से सात जून 2022 को जारी की गई अधिसूचना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है। जबकि महिलाओं और पुरुषों के लिए बराबर किराया होना चाहिए। पथ परिवहन निगम की ओर से ग्रीन कार्ड जारी करने को भी प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है।
हरिजन बस्ती के लिए एंबुलेंस सड़क न बनाने पर सरकार से जवाबतलब
प्रदेश हाईकोर्ट ने हमीरपुर में हरिजन बस्ती के लिए एंबुलेंस सड़क न बनाए जाने पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। स्थानीय निवासी धर्म सिंह की ओर से जनहित में याचिका दायर की गई है। मामले को आगामी 24 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इस मामले मेें राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हमीरपुर-सुजानपुर सड़क से डोडरू हरिजन बस्ती के लिए एक किलोमीटर एंबुलेंस सड़क बनाई जानी प्रस्तावित है। इस सड़क निर्माण के लिए कुछ हिस्सा सरकारी जमीन और कुछ हिस्सा निजी जमीन का लगता है। निजी जमीन के तीन मालिकों ने अपनी जमीन लोक निर्माण विभाग को दे दी है। बाकी बचे निजी जमीन मालिकों की ओर से विभाग को जमीन न देने के कारण इस सड़क के निर्माण कार्य में देरी हो रही है। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में जवाब दायर करने के लिए तीन हफ्ते के समय की मांग की गई। मामले की सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है।