अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के देशों के 26 युवा नेता यूनाइटेड नेशनस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (यूएसआईपी) की अध्यक्ष नैंसी लिंडबोर्ग के नेतृत्व में मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में धर्मगुरु दलाईलामा से मिले। दुनिया के 26 युवा नेताओं ने दलाईलामा को शांति का प्रतीक बताया।दल ने दलाईलामा के साथ विभाजित समाज में समावेशी शांति के बारे में वार्ता की। घंटे भर चली बातचीत में युवा नेताओं ने मानवता की एकता को अपनाने, आंतरिक मूल्यों के शिक्षण को एक अकादमिक विषय के रूप में पढ़ाने और समग्र शिक्षा के माध्यम से गलत भावनाओं को बदलने पर विचार किया।
धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि हम सभी समान शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विशेषताओं वाले मनुष्य हैं। हमारा अंतिम लक्ष्य खुशी हासिल करना और समाज को दुखों से मुक्त करना है। उन्होंने दोहराया कि दया मानव की सबसे सहज प्रकृति है। उन्होंने सुझाव दिया कि आदर्श शिक्षा प्रणाली वह है जिसमें आधुनिक शिक्षा के साथ अहिंसा और करुणा दोनों का प्राचीन भारतीय ज्ञान है। हम कमोबेश भौतिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं लेकिन विभिन्न धार्मिक परंपराओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कहा कि नफरत और आलोचनाओं से निपटने के लिए धैर्य और क्षमा का अभ्यास करना होगा।