जनजातीय जिले लाहौल की महिलाओं को भले ही पैतृक संपत्ति का अधिकार न हो, लेकिन वनों की पहरेदारी का जिम्मा उठाकर उन्होंने देश में एक अनोखी मिसाल कायम की है।
थिरोट क्षेत्र के महिला मंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर सामूहिक फैसला लिया है कि शीत मरुस्थल में अगर कोई पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाता पाया गया, उस पर क्षेत्र का महिला मंडल पांच हजार जुर्माना तो लगाएगा ही साथ ही उनका समाज से हुक्का-पानी भी बंद कर दिया जाएगा।
तोद घाटी के क्वारिंग गांव की महिलाओं ने अस्सी के दशक में ही वन बचाओ अभियान का शुभारंभ कर दिया था। आज घाटी का हर महिला मंडल वनों की पहरेदारी कर रहा है।
महिलाओं की वजह से बढ़ा वन दायरा
मजे की बात है कि घाटी की महिलाएं पर्यावरण संरक्षण के अलावा वन्य प्राणियों की रक्षा भी करती हैं। लाहौल वन मंडलाधिकारी एचएल राणा का कहना है कि महिला मंडलों के डर से घाटी में वन रेंज का दायरा बढ़ा है।
वर्ष 2014 से पहले उदयपुर डिपो से सर्दियों के लिए चार हजार क्विंटल बालन की आपूर्ति होती थी, लेकिन इस बार डिमांड बढ़कर सात हजार क्विंटल हो चुकी है। लोग जंगलों से लकड़ी नहीं काट रहे हैं।
2009 के बाद जिले में लकड़ी तस्करी का मामला नहीं आया है। जिला परिषद सदस्य रिग्जिन सांफेल हायरप्पा के अनुसार, उनके गांव से शुरू हुआ अभियान आज पूरे जिले में रंग ला रहा है।
सभी की सहमति के बाद वन कटान पर प्रतिबंध लगाया गया है। अन्य गांवों के लोग भी उनके फैसले का समर्थन कर रहे हैं। वन कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है। -टशी वंज्ञाल, प्रधान, महिला मंडल पलमो और प्रधान, विकासशील युवक मंडल क्वारिंग