मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने पर पांच छात्रों के विरुद्ध दर्ज हुए पुलिस केस की लड़ाई में अन्य छात्र संगठन भी कूदने के लिए तैयार हो गए हैं। घटना के दूसरे दिन वीरवार को एबीवीपी और एसएफआई के कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे गए। इस पर पुलिस का सहारा लेना पड़ा। हालांकि फार्मेसी के छात्रों ने अन्य छात्र संगठनों से किसी भी प्रकार का सहयोग लेने से इंकार कर दिया। वहीं कुछ छात्र अपनी गलती मानने को भी राजी हो गए। पुलिस की ओर से दर्ज किए गए मुकद्दमे का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने की कोशिश पर पांच छात्रों पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमे में दोषी पाए जाने पर छात्रों का भविष्य दांव पर लग सकता है। छात्रों का कहना है कि वह अपने अधिकारों की बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखना चाह रहे थे और लोकतंत्र में यह सब कोई अपराध नहीं है लेकिन पुलिस ने बेवजह उन पर इस प्रकार से मुकदमा बना दिया है। थाना प्रभारी चिंत राम ने बताया कि अभी मामले की जांच चल रही है।
बहुतकनीकी कॉलेज में पत्रकारों ने जोगिंद्रनगर फार्मेसी कॉलेज से जुड़े मसले पर सवाल पूछा तो सीएम ने साफ कहा कि यह सब सुनी-सुनाई बातें हैं जिनपर विश्वास नहीं करना चाहिए। बच्चे आए थे, मिले, बहुत प्यार से मिले। जैसे अपने बच्चों को हम समझाते हैं, उस तरह से उन्हें सुना और समझाया। इसमें कुछ टेक्निकल इश्यू थे। बच्चों की पूरी बात सुनी गई।
ऐसी परिस्थिति में कुछ लोगों ने उनको रास्ता रोकने के लिए प्रोवोक करने की कोशिश की थी जोकि आवश्यक नहीं था। उनकी बात सुन ली थी। बल्कि समस्या के पूरे समाधान के लिए पांच-छह लड़कों को अलग से बैठक के लिए बुलाने की भी बात कही थी कि इसका क्या समाधान हो सकता है? लेकिन राजनीतिक मकसद से कुछ लोग बीच में आकर उन्हें शह दे रहे थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। न किसी पर लाठीचार्ज हुआ है, न किसी को चोट लगी है।