टनलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और वन विभाग की एफसीए प्रक्रिया तीन माह में पूरी हो जाएगी। किरतपुर से नेरचौक तक पांच टनल हैं, जो अभी दो लेन की हैं, जिन्हें फोरलेन करने के लिए समानांतर टनल बनाई जाएगी।
किरतपुर-नेरचौक की समानांतर टनलों का मार्च में टेंडर किया जाएगा। इन टनलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और वन विभाग की एफसीए प्रक्रिया तीन माह में पूरी हो जाएगी। किरतपुर से नेरचौक तक पांच टनल हैं, जो अभी दो लेन की हैं, जिन्हें फोरलेन करने के लिए समानांतर टनल बनाई जाएगी। फिलहाल परियोजना की सबसे लंबी एक नंबर कैंचीमोड़ टनल का ही समानांतर सुरंग का निर्माण चल रहा है, जिसका कार्य अगले छह माह में पूरा हो जाएगा। बाकी चार टनलों के समानांतर टनल बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से डीपीआर तैयार की जा रही है।
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एफसीए प्रक्रिया भी चल रही है। इनके पूरा होते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्तमान में दो लेन की टनल होने से फोरलेन पर वाहनों की गति भी धीमी हो रही है। साथ एक ही टनल से वाहनों के आने-जाने से हादसों का खतरा बना रहा है। वहीं, दिन प्रतिदिन फोरलेन पर बढ़ते ट्रैफिक से समानांतर टनलों की जरूरत और अधिक महसूस हो रही है। बता दें कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर कैंचीमोड में 1,800 मीटर लंबी टनल नंबर-1, थापना में 465 मीटर लंबी टनल नंबर-2, तुन्नु में 550 मीटर लंबी टनल नंबर-3, टीहरा में 1,265 मीटर लंबी टनल नंबर-4 और सुंदरनगर के भवाणा में 740 लंबी टनल नंबर-5 हैं।
किरतपुर से नेरचौक तक चार टनल के समानांतर सुरंग की डीपीआर बनाई जा रही है। एफसीए मंजूरी की प्रक्रिया भी जारी है। करीब तीन माह में यह दोनों प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी। इसके बाद टेंडर किए जाएंगे। - अब्दुल बासित, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई।