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सीएम आवास के बाहर आमरण अनशन करेंगे नेशनल अवार्डी तेज सिंह

Thu, 15 Mar 2018 11:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मंडी
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भारत सरकार से थर्मल पंप के लिए नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन अवार्ड पाने वाले 70 साल के तेज सिंह गोयल अफसरशाही के उदासीन रवैये से आहत हैं। महज दसवीं पास तेज सिंह के सस्ती बिजली, पानी, पेट्रोल और चारे के आविष्कार सरकारी फाइलों की धूल फांक रहे हैं।

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इससे खफा होकर तेज सिंह गोयल ने 27 मार्च को शिमला में मुख्यमंत्री आवास के सामने आमरण अनशन पर बैठने का एलान किया है। इससे पहले भी वर्ष 2010 में वे शिमला में भूख हड़ताल पर बैठे थे, लेकिन अफसरों के आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन बंद किया था।

अमर उजाला से बातचीत में तेज सिंह गोयल ने कहा कि बेशक वे कम पढ़े-लिखे हैं, लेकिन उनके आविष्कारों को भारत सरकार से लेकर एनआईटी हमीरपुर के मैटीरियल साइंस से जुड़े वैज्ञानिकों और विभिन्न विभागों ने भी माना है।
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सरकारों से उनके आविष्कारों पर अमल करने के आश्वासन भी मिले हैं, लेकिन इससे आगे कुछ नहीं हुआ है। उनकी मांग है कि उनके आविष्कारों को आम लोगों के लिए उपयोगी बनाने के लिए आगे अनुसंधान हो। 27 मार्च को शिमला में सीएम आवास के सामने भूख हड़ताल पर बैठने की सूचना सीएम कार्यालय को पत्र से दे दी है।

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त थर्मल पंप पहला शोध

तेज सिंह ने 1987-1988 में थर्मल पंप ईजाद किया। यह पंप पानी को कम लागत में बिना बिजली या डीजल से पंपिंग करने के काबिल था। इसमें बायो फ्यूल मसलन पत्ते, कागज, घास, लकड़ी आदि इस्तेमाल हो सकती थी। हिम ऊर्जा के तत्वावधान में यह पंप तैयार हुआ। वायुमंडल दबाव से पंप चलता था। 2002 में इस शोध के लिए नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन अवार्ड से नवाजा गया।

सस्ती बिजली पैदा करने की तकनीक
साल 1990 में चीड़ की पत्तियों से बिजली पैदा करने का दावा किया। ऊर्जा विभाग से संपर्क हुआ। इसमें अपने शोध में एक किलोग्राम चीड़ की पत्तियों से एक यूनिट बिजली पैदा करने की तकनीक की सार्थकता बताई। तकनीकी पहलुओं का हवाला देते हुए ऊर्जा विभाग ने उनके इस आविष्कार से मुंह मोड़ लिया। आविष्कार का पेटेंट किसी मान्यता प्राप्त एजेंसी से करवाने की बात कही।
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तारपीन से बनाया पेट्रोल

मलोरी पौधे पर भी शोध चर्चा में रहा। उनका दावा था कि हिमाचल में आधुनिक कृषि में मलोरी पौधा मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस पौधे को बारह माह में बंजर जमीन में उगाया जा सकता है। इस पौधे से मुर्गों की फीड निकाली जा सकती है।

वर्ष 2012 में उन्होंने अपने अंतिम आविष्कार तारपीन से पेट्रोल बनाकर सबको हतप्रभ कर दिया। एनआईटी में इसका सफल ट्रायल होने के बावजूद न तो अनुसंधान को स्थापित करने के दावे जमीनी हकीकत पर खरे उतरे। न ही रिसर्च सेंटर खुल सका। बाकायदा, इसका सफल ट्रायल भी हुआ था।
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