हिमाचल प्रदेश की सीआईडी की सूचना पर दुबई में गिरफ्तार किया गया बहुचर्चित टेक्नोमैक घोटाले का मुख्य आरोपी राकेश शर्मा अब जांच एजेंसी के रडार से बाहर हो गया है। मामले की जांच कर रही सीआईडी की एसआईटी ने 43 सौ करोड़ से ज्यादा के घोटाले में लंबी जांच के बाद दो दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
इसके बाद पहले शर्मा को भगौड़ा घोषित कराया और फिर इंटरपोल की मदद से राकेश के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस भी जारी करा दिया। इस बीच, सीआईडी को राकेश के एक साथी से उसकी सही लोकेशन का पता चला। इस सूचना को सीआईडी ने इंटरपोल के साथ साझा किया और 24 दिसंबर 2019 को उसे दुबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद हिमाचल पुलिस ने विदेश मंत्रालय के जरिये प्रत्यर्पण को लेकर कवायद शुरू कर दी। शुरुआती दौर में ऐसा लग रहा था कि हिमाचल पुलिस आरोपी को प्रदेश लाकर उसके किए अपराध की कोर्ट में सजा दिलवा लेगी, लेकिन कोविड के बीच यह प्रक्रिया सुस्त हो गई और अब सीआईडी विदेश मंत्रालय को सिर्फ रिमाइंडर लिख रही है।
सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों विदेश मंत्रालय ने सीआईडी के रिमाइंडर पर जवाब देते हुए यह कहा था कि अबुधाबी से उसे किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिल पाया है। ऐसे में इस बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं है। विदेश मंत्रालय के हाथ खड़े करने के बाद प्रदेश का 43 सौ करोड़ से ज्यादा हड़पकर भागने वाले राकेश शर्मा पर सीआईडी का शिकंजा ढीला पड़ता जा रहा है।