इसी इकाई में कार्यरत रहे कामगारों व कर्मचारियों की लंबित बकाया राशि जो एक वर्ष से नहीं मिली, वह भी 50 से 70 करोड़ के बीच बताई जा रही है।
यह पैसा अक्तूबर 2014 में इकाई के सीज होने पर डूब गया था। इकाई में कार्यरत रहे कर्मचारियों और मजदूरों ने पैसा मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ी है।
कंपनी में कार्यरत रहे नीरज बंसल, मनमोहन शर्मा, सतीश शर्मा, सुभाष चंद और कमल पांडे ने बताया कि उनके साथ कंपनी ने धोखाधड़ी की है।
एफआईआर दर्ज होने से उन्हें उनकी बकाया राशि ब्याज सहित मिलने की उम्मीद जगी है। पुलिस को सौंपे शिकायत पत्र में ईपीएफ के पैसे का भी जिक्र किया गया है। एएसपी वीरेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।