खास बात यह रहेगी कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह कारगर सिद्ध होगा और क्लस्टर स्तर पर डेढ़ साल की अवधि में इस कार्य को अंजाम दिया जाएगा। वर्तमान में भारत में यह चिप चीन से आयात की जाती है। भारत में ही इस का निर्माण होने से जहां इसकी दरों में भी कमी आएगी, वहीं बाहरी देशों के ऊपर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ट्रिपल आईटी ऊना के डायरेक्टर प्रो. मनीष गॉड के अनुसार आईआईटी कानपुर के नेतृत्व में ट्रिपल आईटी ऊना और एनआईटी श्रीनगर की आपस में संयुक्त साझेदारी के तहत ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए अर्धचालक एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों का समन्वित विकास करने की दिशा में इस कार्य को वित्त पोषित किया गया है।
खास बात यह है कि आपसी साझेदारी में तीन बड़े संस्थान मिलकर इसका डिजाइन करेंगे और इसमें इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर एंड साइंस विभाग की भी मदद ली जाएगी। इतना ही नहीं बल्कि इस चिप के निर्मित होने से जहां गाड़ियों की बैटरी की चार्जिंग क्षमता में भी वृद्धि होगी, तो दूसरी ओर चिप लगने से बैटरियों की लाइफ भी बढ़ेगी। आगामी समय में ट्रिपल आईटी ऊना इस कार्य में एमटेक विभाग के प्रशिक्षु इंजीनियरों को भी साथ में शामिल करेगा।
ये होंगे परियोजना का हिस् पीआई और सह-पीआई के रूप में विभिन्न संकाय
सदस्य इस परियोजना का हिस्सा हैं। डॉ. तनु वडैरा, डॉ. अंकुर कुमार, एसओई सह-पीआई डॉ. नमन गर्ग, डॉ. गुरप्रीत कौर, डॉ. मृत्युंजय सिंह, डॉ. शत्रुघ्न मोदी, डॉ. वेजंदला किशोर, डॉ. शिवदत्त शर्मा, डॉ. अंबिगावती एम, डॉ. नवीन चेग्गोजू का नाम इसमें शामिल हैं।