देवभूमि ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर यूनियन का परिवहन मंत्री से आग्रह
शिमला। सरकार ने टैक्सी परमिट का समय 21 साल से घटाकर 8 साल कर दिया है। इस कारण टैक्सी ऑपरेटरों का कारोबार खतरे में पड़ गया है। सरकार यदि परमिट के समय में कटौती करना चाहती है तो कम से कम इसे 15 साल रखा जाए। वीरवार को देवभूमि ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर यूनियन ने परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह से मुलाकात कर यह मांग उठाई। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष अजय ठाकुर ने बताया कि कोविड-19 की मार के कारण एक साल से टैक्सी ऑपरेटरों का व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया है। गाड़ी की किश्तें, इंश्योरेंस, टैक्स चुकाने में टैक्सी ऑपरेटर असमर्थ हो गए हैं। इस बीच सरकार नेशनल परमिट का टैक्स 25000 से 75000 करने जा रही है, ऐसा होता है तो ऑपरेटरों के लिए गाड़ियां बेचने की नौबत आ जाएगी। यूनियन ने परिवहन मंत्री को सरकार की ओर से टैक्सी परमिट जारी करने में अपनाए जा रहे दोहरे कानूनों से भी अवगत करवाया। अजय ठाकुर ने परिवहन मंत्री को बताया कि सरकार ने जहां एक ओर एक ऑपरेटर एक टैक्सी परमिट का नियम लागू किया है वहीं दूसरी ओर सरकारी टेंडर में भाग लेने के लिए वही लोग आवेदन कर सकते हैं जिनके पास कम से कम 5 टैक्सियां हों।
संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नो पार्किंग का चालान 100 रुपये से बढ़ा कर 1000 रुपये किया जा रहा है जबकि प्रदेश में कार पार्किंगों की भारी कमी है। टूरिस्ट सीजन में बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में पर्यटक वाहन पहुंचने के कारण पार्किंगों में टैक्सियों के खड़े होने की जगह ही नहीं मिलती। परिवहन मंत्री ने यूनियन की मांगों को गंभीरता से सुनने के बाद जायज मांगों को हल करने का आश्वासन दिया।