इस बार दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में आसियान के 10 देशों के प्रमुख शामिल होंगे। आसियान देशों के भारत से सदियों पुरानी धार्मिक व सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में गणतंत्र दिवस में कीह मठ की झांकी संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी।
कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा का कहना है कि कीह मठ की झांकी से धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। कीह मठ के प्रमुख टीके लोचेन टुलकू ने भी खुशी जाहिर की है।
राज्य भाषा एवं संस्कृति विभाग के परफॉर्मिगिं आर्ट उप निदेशक बीके शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार को झांकी का डिजाइन और मॉडल दोनों भेजे गए। अब झांकी का चयन हो गया है। झांकी नई दिल्ली में ही बनाई जा रही है।
कीह गोंपा को वर्ष 1008 के आसपास एक बौद्ध लामा धोमतन ने बनवाया था। कीह मठ के पहले प्रमुख लामा रिंचेन्न जंगपो हुए। उसके बाद उनके अवतार लेने वाले रिंपोचे इस गद्दी को संभालते आ रहे हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी दो बार इस गोंपा के दर्शन कर चुकी हैं।
कीह गोंपा के प्रमुख अवतारी टीके लोचेन टुलकु ने बताया कि साल 2000 में कीह मठ ने अपना मिलेनियम (1000 साल) उत्सव मनाया। महामहिम दलाईलामा भी यहां दो बार आ चुके हैं।
20 बौद्ध भिक्षु भी होंगे झांकी में शामिल
झांकी के साथ कीह गोंपा के 20 बौद्ध भिक्षु भी शामिल होंगे। महिला और पुरुष भिक्षु बौद्ध धर्म के पूजा-पाठ और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। वे लामा और पारंपरिक परिधानों में होंगे। इसके लिए कीह गोंपा में पूरी तैयारियां हो चुकी हैं।