आईजीएमसी प्रबंधन पहली बार मेडिसिन ओपीडी, सर्जरी, रेडियोलॉजी और इमरजेंसी विभाग के बाहर स्वैप मशीनें लगाने जा रहा है। प्रबंधन का कहना है कि हर जगह एक-एक मशीनों को स्थापित किया जाएगा। अगर किसी मरीज को ओपीडी में उपचार के बाद टेस्ट करने की सलाह दी जाती है तो ओपीडी के बाहर ही मरीजों के टेस्ट फीस चंद एक पल में चुकायी जा सकेगी।
फीस जमा करवाने के लिए इससे पहले मरीजों को घंटों लाइनों में खड़ा रहना पड़ता था। कैशलेस होने वाला आईजीएमसी प्रदेश का पहला अस्पताल होगा, जहां पर इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि नकदी न होने के कारण मरीजों के कई मर्तबा ऑपरेशन टल चुके थे। ऐसे में आगे कोई दिक्कत न हो इसके लिए यह कवायद शुरू की गई है। इससे अस्पताल में चोरी की घटनाओं पर भी लगाम लगेगी।
अस्पताल में लगेंगी सात नई मशीनें
अस्पताल को कैश लैस किया जा रहा है। इसके लिए प्रबंधन सात नई स्वैप मशीनें खरीद रहा है।- डॉ. रमेश चंद, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
आईजीएमसी में चेक से भी भुगतान
अस्पताल प्रबंधन ने उन लोगों के लिए भी राहत दी है। जिनके मरीज स्पेशल वार्ड में काफी समय से भर्ती हैं। ऐसे मरीज के तीमारदार अब चेक के माध्यम से पूरा भुगतान अस्पताल को कर सकते हैं।
स्वैप मशीन चलाने में आ रहीं दिक्क्तें
मौजूदा समय में काउंटर पर दो मशीन हैं। जिससे नकद भुगतान किया जा रहा है। अब सात नई मशीनें लगने से मरीजों को राहत मिलेगी।