हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी के निलंबन आदेश की समीक्षा अगर 90 दिनों की वैधानिक अवधि के भीतर नहीं की जाती है तो उस सस्पेंशन को अवैध करार दिया जाता है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी के निलंबन आदेश की समीक्षा अगर 90 दिनों की वैधानिक अवधि के भीतर नहीं की जाती है तो उस सस्पेंशन को अवैध करार दिया जाता है। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए 31 अगस्त 2024 के निलंबन और उसके बाद के सभी विस्तार आदेशों को अवैध घोषित कर रद्द कर दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता सहायक प्रोफेसर की सेवाओं को बहाल करने के आदेश दिए हैं।
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इसके साथ ही याचिकाकर्ता की निलंबन की अवधि के वेतन और अन्य लाभों को नियमों के अनुसार जारी करने के निर्देश दिए है। अदालत ने फैसले में कहा गया है कि नियम 10 (7) के तहत यदि 90 दिनों के भीतर समीक्षा नहीं होती तो निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रहता और अपनी वैधता खो देता है। अदालत ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि बाद में जारी किए गए आदेशों से देरी को माफ माना जाना चाहिए। चूंकि 31 अगस्त 2024 के निलंबन आदेश की समीक्षा 28 नवंबर 2024 से पहले नहीं की गई, इसलिए इसके बाद जारी किए गए विस्तार आदेशों का कोई कानूनी महत्व नहीं रह जाता।