शव का अंतिम संस्कार और हरिद्वार में अस्थियां बहाने के बाद घर लौटे परिवारवालों ने कुछ ऐसा देखा कि सभी दंग रह गए। मामला शिमला का है। यहां पुलिस ने पहले परिजनों से एक शव का संस्कार करवा दिया और फिर सात दिन बाद उसी आदमी का शव दोबारा ले आई।
संस्कार कर हरिद्वार में अस्थियां बहाकर क्रिया-कर्म कर रहे परिजनों ने जब दूसरे शव को देखा तो उनके होश फाख्ता हो गए। यह शव उनके अपने का था। मामला सुन्नी तहसील की रेयोग पंचायत का है।
रमेश शर्मा शिक्षा विभाग में सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे और सुन्नी के चलाहल में तैनात थे। 29 जून को थली पुल से सतलुज में छलांग लगाकर इन्होंने आत्महत्या कर ली। रमेश का ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था, उसके बाद वह कुछ परेशान थे।
सतलुज में कूदकर दी थी जान, परिजनों ने की थी शिनाख्त
आईजीएमसी अस्पताल में भी इलाज चल रहा था। घटना वाले दिन वह घर से दवा लेने के लिए निकले थे। सतलुज में छलांग लगाने के बाद उन्हें स्थानीय लोगों और पुलिस ने ढूंढने की काफी कोशिश की लेकिन कोई सुराग नहीं लगा।
कुछ दिन बाद करसोग पुलिस ने एक शव को बरामद किया और इसकी सूचना रमेश के परिजनों की दी। जो शव दिखाया गया, उसके सिर पर नौ टांके लगे हुए थे और चेहरा खराब हो चुका था। रमेश का शव समझ कर परिजन ले गए और उसका पूरी रीति रिवाज के साथ दाह संस्कार भी कर दिया।
दूसरी बार मिला रमेश का शव
इसी दौरान सुन्नी पुलिस ने भी सतलुज से एक शव बरामद किया। जिस तरह की पहचान परिजनों की ओर से पुलिस को बताई गई थी, शव से वह मिल रही थी। परिजनों ने जब शव को देखा तो वह तुरंत पहचान गए। 15 जुलाई को यह शव सुन्नी पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद परिजनों ने रमेश का दाह संस्कार कर दिया।
रेयोग ग्राम पंचायत प्रधान खेमराज ने कहा कि पहला शव रमेश का बताया गया था जिसका दाह संस्कार कर दिया गया। लेकिन इसके कुछ दिन बाद दूसरा शव दिया, जो रमेश का था। रमेश का भी दाह संस्कार कर दिया गया है।
पहले शव की जानकारी नहीं
सुन्नी पुलिस के मुताबिक 15 जुलाई को रमेश का शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। पहले बरामद किए गए शव के बारे में कोई जानकारी नहीं है।