प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुशील शिंदे ने बीते कुछ दिन से पार्टी में एक परिवार में एक टिकट पर सफाई देते हुए कहा कि इसका फैसला केंद्रीय चुनाव समिति करती है। जिले से प्रत्याशियों के नामों की सूची प्रदेश कमेटी के पास जाती है, उसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति इस पर निर्णय लेती है।
उन्होंने कहा कि उनकी बेटी दो बार विधायक रही हैं। कई ऐसे परिवार हैं, जहां से तीन-तीन सदस्यों को टिकट दिए गए हैं। बाहरी लोगों को टिकट देने की बात पर शिंदे बोले - बुरे वक्त में पार्टी के प्रति सच्ची निष्ठा रखने वालों पर पार्टी जरूर विचार करेगी।
सरकार और संगठन में मतभेद पर शिंदे ने कहा कि चुनाव का एलान होते ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी प्रदेश में रैलियां करेंगे। सोनिया और राहुल गांधी ही प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व तय करेंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र में सत्तासीन सरकार पर एक धर्म विशेष पर बात करती है, जबकि कांग्रेस सर्वधर्म को मानने वाली पार्टी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह संगठित है।
शिंदे ने कहा कि सरकार और संगठन में झगड़े होना अच्छी बात है और झगड़ों से जंग जीती जाती है। सुक्खू के हाथ में तलवार नहीं, बल्कि कांग्रेस का झंडा है। कहा कि वर्ष 1993 में कभी पंडित सुखराम और वीरभद्र सिंह के बीच भी झगड़ा हुआ करता था।
हर व्यक्ति को पार्टी में अपनी बात रखने का अधिकार है और इस तरह के झगड़ों को कांग्रेस सुलझाती आई है। शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह 84 वर्ष की आयु होने के बावजूद आज भी प्रदेश की जनता की सेवा करने के लिए दिन रात काम करते हैं। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू, प्रदेश सह प्रभारी एवं सांसद रंजीता रंजन भी मौजूद रहे।