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हैरानी: एक घंटे में मरीज के करवा डाले 23 एक्सरे, मगर बीमारी का नहीं लगा पता

Tue, 05 May 2015 10:56 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
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सरकारी अस्पताल में मरीज को एक्सरे की कीमत 1150 रुपये चुकानी पड़े तो आपको हैरत होगी। आईजीएमसी के डाक्टर आजकल ऐसे कारनामे करने में जुटे हैं।
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इमरजेंसी वार्ड से एक मरीज को एक्सरे करवाने के लिए भेजा गया। मरीज की पर्ची देखी तो वह हैरान कर देने वाली थी। इसमें मरीज के 23 एक्सरे करवाने के लिए लिखा था।

यह कोई पहला मामला नहीं है, शाम चार बजे के बाद अस्पताल का कैजुल्टी वार्ड प्रशिक्षु डाक्टरों के हवाले रहता है। विशेषज्ञ डाक्टरों की गैर मौजूदगी में प्रशिक्षु डाक्टर मरीज पर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते।
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वह अपने स्तर पर हर तरह से एक्सरे कर तसल्ली करते हैं। लेकिन डाक्टरों की यह तसल्ली मरीजों पर भारी पड़ रही है। यही नहीं एक्सरे ठीक नहीं आया तो मरीज को फिर से भेज दिया जाता है।
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रेडिएशन का रहता है खतरा

इससे जहां मरीजों को रेडिएशन का खतरा रहता है वहीं एक्सरे फीस भी कई गुणा चुकानी पड़ती है। अस्पताल में शाम के समय मरीजों के जरूरत से ज्यादा एक्सरे करवाए जा रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि मरीज को चेक किए बिना ही मरीज को एक्सरे लिख दिए जाते हैं। आपातकालीन वार्ड में प्रशिक्षु डाक्टरों के हाथों एक्सरे करवाने के बाद मरीज को आपरेट करने से पहले एक बार फिर एक्सरे करवाने होते हैं।

इलाज करवाने अस्पताल पहुंचने वाले मरीज डाक्टर के आगे कुछ नहीं कह पाते। शाम के समय विशेषज्ञ डाक्टरों के न होने से ऐसी दिक्कतें पेश आ रही हैं। आईजीएमसी राज्य स्तरीय अस्पताल है, यहां प्रदेश भर से मरीज आते हैं।

शाम के समय अधिकांश मरीज दूसरे जिलों से रेफर होकर पहुंचते हैं। इन्हें यहां प्रशिक्षु डाक्टर ही देखते हैं। राज्य सरकार की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक रेफर मरीज को सीनियर डाक्टर देखें लेकिन शाम के समय यह सेवा आईजीएमसी में आज तक अस्पताल प्रबंधन उपलब्ध नहीं करवा पाया है।
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