सुरेंद्र सिंह होंगे जॉर्ज क्रॉस मेडल के उत्तराधिकारी
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यूनाइटेड किंगडम के विक्टोरिया क्रॉस के बाद दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार जॉर्ज क्रॉस मेडल के अब हिमाचल प्रदेश के घुमारवीं के भपराल गांव के सुरेंद्र सिंह उत्तराधिकारी होंगे। अंग्रेजी हुकूमत ने द्वितीय विश्व युद्ध में साथियों की जान बचाते शहीद हुए भपराल गांव के वीर सैनिक 13वीं फ्रंटियर फोर्स की आठवीं बटालियन में तैनात किरपा राम को मरणोपरांत 15 मार्च 1946 को यह सम्मान उनकी पत्नी ब्रह्मी देवी (14 वर्ष, उस समय की उम्र) को दिया था। शनिवार को उनकी पत्नी ब्रह्मी देवी (93) के हृदय गति रुकने से निधन के बाद अब इस मेडल पर उनके दूर के रिश्ते में भतीजे सुरेंद्र सिंह का हक होगा। ब्रह्मी देवी के बाल विवाह के बाद न तो उनकी कोई संतान थी और न परिवार में कोई और था। उनकी देखभाल सुरेंद्र ही कर रहे थे। ब्रह्मी देवी ने सुरेंद्र के नाम पर ही अपनी वसीयत करवाई है। यह मेडल उस समय चर्चा में आया था, जब साल 2002 में ब्रह्मी देवी के घर से मेडल चोरी हो गया। पुलिस में मामला दर्ज हुआ, लेकिन मेडल भारत से होकर इंग्लैंड पहुंच गया था।
इसके बाद मेडल वापस लाने में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। वर्ष 2009 में इंग्लैंड में एक नीलामी घर में जब इस मेडल को सूचीबद्ध किया तो इसकी जानकारी बिलासपुर के लोगों को मिली। उन्होंने सरकार के समक्ष मामला उठाया। लंबी जद्दोजहद के बाद राज्य और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद मामला कोर्ट पहुंचा। जून 2013 में दोनों पक्षों की आपसी सहमति के बाद लंदन की अदालत ने मेडल वापस ब्रह्मी देवी को लौटाने के निर्देश दिए। इंग्लैंड के अधिवक्ता इयान मेएज ने इसकी छानबीन की तो ब्रह्मी देवी की कमजोर आर्थिक स्थिति का पता चला। उन्होंने ब्रह्मी देवी के लिए निशुल्क केस लड़कर जीता और जॉर्ज क्रॉस मेडल की वापसी का रास्ता साफ हुआ। वर्ष 2015 में एक सादे समारोह में ब्रिटिश उच्चायोग के सुरक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर ब्रायन मैकॉल, ब्रिटिश उप उच्चायोग चंडीगढ़ डेविड लिलयेट ने स्वयं अपने हाथों से यह मेडल ब्रह्मी देवी को लौटाया। हालांकि मेडल चोरी किसने किया और इंग्लैंड कैसे पहुंचा, इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया। संवाद
द्वितीय विश्व युद्ध में स्वेच्छा से दी थीं सेवाएं
वर्ष 1916 में जन्मे किरपा राम ने द्वितीय विश्व युद्ध में स्वेच्छा से भारतीय सेना को अपनी सेवा समर्पित की थी। उन्हें बर्मा अभियान में सम्मिलित किया था और भारत लौटकर एक फील्ड फायरिंग अभ्यास के दौरान एक राइफल ग्रेनेड गलती से उनकी यूनिट से कुछ दूरी पर जा गिरा। 28 वर्षीय किरपा राम चिल्लाते हुए अपने साथियों की ओर दौड़े, ताकि वे लोग अपना बचाव कर सकें। वह उस ग्रेनेड को उठाकर सुरक्षित दूरी पर फेंकने लगे, लेकिन ग्रेनेड उनके हाथ में ही फट गया, जिससे उनकी मौत हो गई। उनके इस आत्म बलिदान ने उनकी यूनिट के सदस्यों की जान बचा ली।