हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शिमला में बड़ी परियोजनाओं के निर्माण न होने पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने नगर निगम शिमला को आदेश दिए कि वह इस पर ताजा स्टेट्स रिपोर्ट दायर करें। अदालत ने मामले की सुनवाई 25 मई को निर्धारित की है। नमिता मनिकटाला की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि शिमला शहर में लंबित वन मंजूरी के कारण छह बड़ी परियोजनाओं का काम लटका हुआ है। इसमें लक्कड़ बाजार में लिफ्ट और एस्केलेटर, जाखू मंदिर के लिए एस्केलेटर, संजौली से आईजीएमसी तक स्मार्ट पथ, खलीनी में वेंडिंग जोन, कृष्णा नगर के कंबमीयर नाले का जीर्णोंधार और ढली क्षेत्र को चौड़ा करने इसमें शामिल था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये परियोजनाएं शिमला शहर के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके निर्माण से शहर के लोगों की जिंदगी संवर जाएगी। शिमला शहर ट्रैफिक समस्या से जूझ रहा है। यदि ये परियोजनाएं पूरी होती हैं तो निश्चित रूप से लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के पर्यावरण विभाग सहित प्रदेश के मुख्य सचिव, नगर निगम शिमला और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट मिशन के निदेशक को प्रतिवादी बनाया है। अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने यह याचिका 22 जून 2021 को प्रकाशित खबर के आधार पर दायर की थी। अदालत को बताया कि उसके बाद अब इस मामले पर सुनवाई हो रही है, जबकि नगर निगम ने इस मामले में ताजा रिपोर्ट दायर नहीं की है।