फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pong Dam: विस्थापितों से मिले सुप्रीम कोर्ट के वकील, बोले- जल्द मिलेगा न्याय

Sun, 16 Apr 2023 09:25 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, राजा का तालाब (कांगड़ा)

सार

प्रीम कोर्ट के वकील विनोद शर्मा ने बताया कि विभिन्न मामलों में अलग-अलग याचिकाएं दायर हैं। कई पौंग बांध विस्थापितों का आज तक राजस्थान में पुनर्वास नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
बैठक के दौरान बातचीत करते अधिवक्ता विनोद शर्मा। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति की राजा का तालाब के निजी पैलेस में रविवार को बैठक हुई। इसमें सुप्रीम कोर्ट के वकील विनोद शर्मा विशेष रूप से विस्थापितों से रूबरू हुए। बैठक में प्रदेशभर से आए भारी संख्या में विस्थापितों ने हिस्सा लिया। पौंग बांध विस्थापितों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की पांच अप्रैल को हुई पहली सुनवाई के बाद प्रदेश पौंग बांध समिति की यह पहली बैठक थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से पौंग बांध विस्थापितों के मामले में केंद्र, राजस्थान और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करके आठ मई से पहले जवाब तलब किया गया है।

विज्ञापन




इसी बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील विनोद शर्मा और उनके सहयोगी रविवार को विस्थापितों से रूबरू हुए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के वकील विनोद शर्मा ने बताया कि विभिन्न मामलों में अलग-अलग याचिकाएं दायर हैं। कई पौंग बांध विस्थापितों का आज तक राजस्थान में पुनर्वास नहीं हो पाया है। कई मामले में विस्थापितों का राजस्थान में भू आवंटन निरस्त हुआ है। कुछ विस्थापितों को समझौते के अनुरूप वहां भू आवंटन नहीं हुआ है। कुछ मामलों में वहां का भू-माफिया बसने नहीं दे रहा। द्वितीय चरण बिना मूलभूत के भू आवंटन किया गया है। मिलीभगत से फ्रॉड के कई मामले हुए हैं।

ऐसी कुछ और याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं जिनको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राजस्थान और प्रदेश सरकार से आठ मई से पहले जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट से जल्द न्याय मिलेगा, ऐसी पूर्ण संभावना है। इस मौके पर प्रदेश पौंग बांध समिति के प्रधान हंसराज चौधरी ने कहा कि हिमाचल के लोगों ने पौंग बांध निर्माण में भूमि को जलमग्न करवाया। इस हिसाब से उस समय का समझौता ही गलत था। विस्थापितों को भूमि के बदले हिमाचल में ही भूमि मिलनी चाहिए थी। तीन हजार किलोमीटर दूर तपते रेगिस्तान में लोगों को राजस्थान में बसने के लिए मजबूर किया गया।
विज्ञापन


समझौते के अनुरूप जिला श्रीगंगानगर में 2 लाख 20 हजार एकड़ भूमि पर बसना मंजूर हुआ लेकिन राजस्थान सरकार की मिलीभगत और प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये ने विस्थापितों की भावनाओं को कुचलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। किसी सरकार ने उन्हें समझौते के अनुरूप राजस्थान में भूमि दिलवाने की प्रक्रिया नहीं अपनाई। वहीं मूलभूत सुविधाओं से वंचित तपते रेगिस्तान के बॉर्डर एरिया में उन्हें भूखा मरने के लिए छोड़ दिया। इस दौरान समिति वरिष्ठ सचिव एचसी गुलेरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एमएल कौंडल, बीएस पगड़ोत्रा, प्यारे लाल, कुलदीप शर्मा, रघुवीर लालिया, संजीव कुमार सहित हजारों विस्थापित मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें