भारी गाद के चलते लगातार दूसरे दिन गिरि से शहर को नहीं मिला पानी, जलसंकट गहराया
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चौथे और पांचवें दिन भी मिल रहा कम पानी गाड़ियों में पानी ढोने को मजबूर हो रहे हैं लोग अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राजधानी में पेयजल संकट फिर से गहरा गया है। शहर में टैंकरों के जरिये पानी की आपूर्ति की जा रही है। गिरि पेयजल परियोजना लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी बंद रही। इस परियोजना से पानी न मिलने के कारण पेयजल कंपनी शहर में चौथे और पांचवें दिन सप्लाई तो दे रही है लेकिन पानी की मात्रा घट गई है। इस पानी से लोगों की टंकियां नहीं भर रहीं। हालात यह है कि पंथाघाटी, कसुम्पटी समेत कई इलाकों में लोग गाड़ियों में पानी ढोने को मजबूर हैं। खुद नगर निगम उपमहापौर उमा कौशल के घर पर शनिवार को पानी नहीं था।
कंपनी के अनुसार उपमहापौर के टुटीकंडी वार्ड में रविवार को पानी आएगा। वार्ड के लोगों ने उपमहापौर से पानी को लेकर शिकायत भी की। कहा कि घरों में अब पीने लायक पानी नहीं बचा है। इसके बाद इस इलाके में टैंकरों से आपूर्ति की गई। शनिवार को शाम 4 बजे तक 19 टैंकरों की मांग कंपनी के पास पहुंची। बालिका आश्रम, मिल्कफेड दफ्तर समेत कई जगहों पर पानी के टैंकर भेजे गए हैं।
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गिरि पेयजल परियोजना में गाद का सिलसिला नहीं थम रहा। इस परियोजना के टैंकों से गाद और मलबा निकालने का काम शनिवार को भी जारी रहा। परियोजना से शनिवार शाम 5:00 बजे तक पंपिंग शुरू नहीं हो पाई है। गाद की मात्रा तीन हजार एनटीयू से ज्यादा बनी हुई है। शहर की सभी पेयजल परियोजनाओं से शिमला शहर को 25.16 एमएलडी पानी मिला है। यह सामान्य से करीब 23 एमएलडी कम रहा।
अब गाड़ियों में ढो रहे पानी शहर के कसुम्पटी क्षेत्र में लोग गाड़ियों में पानी ढो रहे हैं। पूर्व उपमहापौर राकेश शर्मा ने कहा कि कसुम्पटी और पंथाघाटी में पेयजल आपूर्ति चरमरा गई है। लोगों को चौथे और पांचवें दिन भी कम पानी मिल रहा है। कंपनी को आपूर्ति सुधारनी चाहिए।
गिरि से पंपिंग के जारी हैं प्रयास गिरि में गाद काफी ज्यादा है जिसके चलते पंपिंग नहीं हो पा रही है। टैंकों से मलबा निकाला जा रहा है लेकिन गाद नहीं थम रही। बाकी परियोजनाओं से शहर के लिए पंपिंग बढ़ाई जा रही है। -राजेश कश्यप, महाप्रबंधक पेयजल कंपनी