प्रदेश सरकार मंत्रियों को अधीक्षक देने की तैयारी कर रही है। इन अधीक्षकों की तैनाती का मामला वित्त विभाग के पास पहुंच गया है। अभी मंत्रियों को सेक्शन ऑफिसर, निजी सचिव (पीएस) और अन्य स्टाफ दिया गया है। सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संघ ने अधीक्षकों की तैनाती का मामला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से उठाया था, जिसके बाद इसे सिरे चढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है।
पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान भी मंत्रियों के कमरे में अधीक्षकों की तैनाती की गई थी। लेकिन बाद में इन्हें हटाकर शाखाओं में भेज दिया गया। उस दौरान कई को पदोन्नत कर मंत्री के कमरे में बतौर सेक्शन ऑफिसर की तैनाती की गई। संघ का कहना है कि अधीक्षकों के पद खत्म हो रहे हैं।
सरकार अगर अधीक्षकों की तैनाती करती है तो इससे निचले कर्मचारियों को फायदा होगा। वे पदोन्नत होकर अधीक्षक बन सकेंगे। शाखाओं की अपेक्षा मंत्रियों के कमरों में ज्यादा काम होता है। लोगों के मंत्रियों से मिलने के बाद फाइलें शाखाओं में भेजी जाती हैं। ऐसे में अधीक्षक की तैनाती से जहां काम में तेजी आएगी, वहीं कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा।
संघ के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि पूर्व सरकार में भी इस मामले को कैबिनेट की बैठक में ले जाया गया था लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं किया गया। अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से यह मामला उठाया गया है। सरकार ने इस मामले को वित्त विभाग को भेजा है। कैबिनेट की बैठक से मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारियों को इसका फायदा मिल सकता है।