हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और तीन सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह टलने पर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को निशाने पर लेते हुए पूछा है कि शपथ ग्रहण समारोह किसके इशारे पर रद्द हुआ। यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजभवन से फाइल मंजूर होने के बाद फिर नामंजूर कैसे हुई, इसको लेकर मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए। सुक्खू ने कहा कि आयोग में डॉ. रचना गुप्ता को अध्यक्ष लगाया जा रहा था। वह पहले आयोग में सदस्य रही हैं। मुख्यमंत्री बताएं कि जब अध्यक्ष के लिए उनके नाम पर मुहर लग गई थी तो फिर शपथ रोकने के पीछे क्या कारण रहे। क्या वह योग्य उम्मीदवार नहीं थीं। किसके कहने पर उनकी नियुक्ति अंतिम वक्त रोकी गई। सरकार कौन चला रहा है। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग सांविधानिक संस्था है। इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों का इस तरह का मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार तो रिमोट से चल रही है। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह को हटाने की जानकारी भी मुख्यमंत्री को नहीं थी। मुख्य सचिव को मंत्रिमंडल की बैठक के बीच ही बदल दिया गया था।
लोकसेवा आयोग की गरिमा बनाए रखने में सरकार नाकाम : नरेश
कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष नरेश चौहान ने सरकार से संवैधानिक संस्थानों की नियुक्तियों में पारदर्शिता बरतने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार लोकसेवा आयोग की गरिमा बनाए रखने में नाकाम साबित हुई है। नरेश चौहान ने कहा कि बुधवार को शाम 6:00 बजे से लेकर वीरवार सुबह 8:30 बजे तक जो घटनाक्रम हुआ, उससे सभी हैरत में हैं। बुधवार शाम को सरकार ने लोकसभा आयोग के अध्यक्ष के साथ तीन सदस्यों की नियुक्ति अधिसूचना जारी कर दी। वीरवार सुबह राजभवन में रखा गया शपथ ग्रहण समारोह टाल दिया गया। चौहान ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि अधिसूचना जारी होने के बाद शपथ ग्रहण कार्यक्रम क्यों टाल दिया। सरकार बताए कि क्या चयन एवं नियुक्ति प्रक्रिया के तहत तय नियमों का पालन किया गया या नहीं। यदि किया गया तो रातों रात ऐसा क्या दबाव पड़ गया कि सरकार का अपना ही फैसला रद्द करना पड़ा। मुख्यमंत्री को पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। लोकसेवा आयोग एक संवैधानिक एवं स्वायत्त संस्था है। आयोग के माध्यम से ब्यूरोक्रेसी से लेकर अन्य नियुक्तियां होती है। ऐसे में इसकी गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।