नेपाल मूल निवासी अजय (11) अपने दादा-दादी के साथ भाटो गांव में रहता था। दादा-दादी यहां एक व्यक्ति के पास खेत में काम करते हैं। वीरवार को करीब चार बजे रोज की तरह वह स्कूल से घर लौटा। दादा और दादी पास ही खेत में काम कर रहे थे। स्कूल से आने के बाद वह दादा-दादी के लिए चाय लेकर खेत जाता था, लेकिन वीरवार शाम को जब वह खेत नहीं आया तो दादी अपने ढारे में पहुंचीं। करीब 5:30 बजे जब दादी ढारे में पहुंची तो अजय छत पर लगी लकड़ी पर चुन्नी के फंदे पर झूल रहा था।
दादी ने शोर मचाया तो आस-पड़ोस के लोग भी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने तुरंत चुन्नी काटकर बच्चे को नीचे उतारा। ग्रामीणों ने सांस देने और छाती पर पंपिंग के साथ प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं आया। इसके बाद उसे ठियोग सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, वहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। अजय ने वर्दी तक नहीं बदली थी। स्कूल के ट्रैक सूट में ही उसने फंदा लगा लिया। इस घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।
शुक्रवार को आईजीएमसी शिमला में शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। पुलिस जांच और पूछताछ के बाद पता चला कि बच्चे को उसके माता-पिता ने करीब तीन साल पहले बुजुर्ग दादा-दादी के पास छोड़ दिया था। माता-पिता अलग हो गए हैं। अजय राजकीय प्राथमिक विद्यालय बलग में पढ़ता था। स्कूल के शिक्षकों, दादा-दादी और स्थानीय लोगों से पूछताछ में पता चला कि माता-पिता के छोड़े जाने के कारण अजय अकेलेपन और अवसाद से ग्रस्त था। पुलिस ने बच्चे के माता-पिता को फोन के माध्यम से सूचित कर दिया है। उधर, डीएसपी ठियोग सिद्धार्थ शर्मा ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है।
स्कूल के ट्रैक सूट में ही फंदा लगा लिया। इस घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। बताया जा रहा कि बच्चे का पिता मुंबई में काम करता है। जबकि मां उसे तीन साल की उम्र में ही छोड़ कर चली गई थी। उधर, ठियोग थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम आईजीएमसी शिमला में करा रही है। मामले की जांच जारी है।