फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: आईजीएमसी की लैब में शुगर और थॉयरायड के टेस्ट बंद

विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी लैब में टेस्ट किट खत्म होने से मरीजों को झेलनी पड़ती हैै परेशानी, निजी लैब संचालकों की मौज
विज्ञापन

निजी लैबों में दोगुना दरों पर होते हैं टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) की सरकारी लैब में रूटीन में किए जाने वाले थॉयराइड, शुगर और सीएचजी टेस्ट बंद हो गए हैं। टेस्ट न होने से सैकड़ों मरीज परेशान हैं। अधिकांश मरीज जल्दी जांच करवाने के लिए निजी लैबों में टेस्ट करवाने को मजबूर हैं। अस्पताल की लैब में टेस्ट किट खत्म हो गई है।

मरीजों को पेश आ रही इस परेशानी का हल अस्पताल प्रबंधन भी नहीं कर पा रहा है। आईजीएमसी में रोजाना हजारों मरीज उपचार के लिए आते हैं। ओपीडी में जांच के बाद चिकित्सक मरीजों को थॉयराइड, एचबीए 1 सी और सीएचजी टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। मरीज फार्म भरकर जब काउंटरों पर जाते हैं, तो उन्हें सरकारी लैब में इन टेस्टों के न होने की बात कहकर वापस भेजा जा रहा है। इस वजह से मरीजों को जल्द रिपोर्ट के चक्कर में निजी लैबों में यह टेस्ट करवाने पड़ रहे है। आर्थिक रूप से कमजोर तबके के मरीजों को दोपहर बाद का इंतजार करना पड़ रहा है। दोपहर बाद यह टेस्ट सरकार द्वारा अधिकृत क्रस्ना लैब में होते हैं लेकिन दूर दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को इस कारण बिना टेस्ट करवाए ही लौटना पड़ रहा है।
विज्ञापन


मंडी के रामलाल और किन्नौर के किंजल नेगी ने बताया कि प्रबंधन सभी टेस्ट सरकारी लैब में करने के दावे करता है, लेकिन जब टेस्ट करवाने गए तो मना कर दिया गया। कहा कि दोपहर बाद निजी क्रस्ना लैब में यह टेस्ट होंगे। उन्होंने मांग की है कि एक या दो टेस्ट करवाने के लिए उन्हें दो से तीन घंटों तक इंतजार करना पड़ा है। निजी लैबों में यह टेस्ट दोगुना महंगी दरों पर होते हैं। आईजीएमसी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष हरिंद्र सिंह मेहता ने बताया कि टेस्ट किट संबंधी मामला प्रबंधन के समक्ष उठाया जाएगा।



लाखों की मशीनें खराब होने की कगार पर
अस्पताल की सरकारी लैब में लाखों रुपये की मशीनें लगी हैं। इन मशीनों में औसतन 200 से 300 के करीब टेस्ट हर रोज होते हैं लेकिन अब किट नहीं आ रही है, तो यह मशीनें खराब होने की कगार पर हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बार जब किट आती है तो वह भी नाम मात्र होती है। दो से तीन दिन में ही यह खत्म हो जाती है। इस कारण मरीजों को दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ता है।


नियमित कर्मचारियों को नहीं मिल रहीं छुट्टियां
अस्पताल के नियमित कर्मचारियों पर भी काम का अतिरिक्त बोझ है। दो-दो शिफ्टों में उनसे ड्यूटियां ली जा रही हैं। कर्मचारियों को एक माह से छुट्टियां नहीं मिल रही हैं। इस वजह से नियमित कर्मचारियों पर भी काम का अतिरिक्त बोझ बना हुआ है।
विज्ञापन





देरी से पहुंच रहा है खाना आईजीएमसी के मेडिसिन वार्ड में आए सिरमौर के दलीप सिंह ने बताया कि अस्पताल में अव्यवस्था का आलम है। मरीज को शुगर की समस्या है। ऐसे में मरीज को समय पर खाना चाहिए होता है, लेकिन अस्पताल में एक घंटा देरी से खाना पहुंचता है। पूछने पर कहा जाता है कि कर्मचारी कम हैं। इस वजह से देरी होती है। सर्जरी विभाग में कुल्लू से मरीज के साथ आए तीमारदार अनिल ने बताया कि वार्ड में समय पर सफाई नहीं होती है। कर्मचारी नहीं हैं तो इनकी व्यवस्था की जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें