जर्मनी की एजेंसी के सहयोग से हिमाचल प्रदेश में सूख रहे झरनों में पानी लौट आया है। चंबा और कांगड़ा जिलों में जर्मनी फाइनेंशियल काॅरपोरेशन के सहयोग से चली परियोजना से यह सफलता मिली है। इस परियोजना के सहयोग से ड्राई स्टोन चैक डैम, फार्म पोंड बनाए गए और पौधरोपण किया गया। लोगों को स्थानीय वनस्पतियों से कई तरह की वस्तुओं को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। राज्य सचिवालय में याेजना विभाग के समक्ष वन विभाग ने यह सफल कहानी रखी है। यह परियोजना 29 दिसंबर 2015 से 28 दिसंबर 2022 के बीच चली। इसकी अवधि को 29 दिसंबर 2022 से 30 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु छत परियोजना जर्मन वित्तीय सहयोग यानी केएफडब्ल्यू जर्मन विकास बैंक के सहयोग से चल रही है। इसकी अवधि 10 साल 3 महीने की है।