प्रदेश के बागवानी महकमे ने हजारों बागवानों की सब्सिडी को दबा दिया है। ये उपदान पॉवर स्प्रेयर, टिल्लर जैसे महंगे उपकरणों पर दिया जाना था। सरकार के अफसर सब्सिडी नहीं दे पाने का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ रहे हैं। राज्य सरकार के बागवानी विभाग की ओर से हिमाचल के बागवानों को पिछले कुछ वर्षों से हाइटेक उपकरणों को खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है।
ये भी प्रचार किया जा रहा है कि राज्य के बागवानों को इसके लिए पचास प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। असल में ये दावे धरातल पर खरे नहीं उतर रहे हैं। बागवानों से उपदान के आवेदन भरवाए जा रहे हैं, मगर उन्हें ये सब्सिडी नहीं दी जा रही है। कई क्षेत्रों में तो ये उपदान पिछले दो से तीन सान पहले खरीदे गए बागवानी उपकरणों पर भी नहीं दिया गया है।
प्रदेश के बागवानों ने इस पर गहरा रोष जताया है। उधर, प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा ने बताया कि जैसे-जैसे बजट आ रहा है, वैसे-वैसे ही लंबित सब्सिडी जारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध बजट के आधार पर ही ये सब्सिडी दी जा सकती है। बागवानी तकनीकी मिशन में केंद्र सरकार से सीमित बजट आता है।
बागवानी मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में भी सैकड़ों मामले
बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स के निर्वाचन क्षेत्र में भी बागवानी उपकरणों की सब्सिडी पिछले दो से तीन साल से जारी करने के सैकड़ों मामले हैं। प्रदेश के तमाम बागवानी क्षेत्रों के लगभग यही हाल हैं।