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नहीं रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथी गणेश

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आजाद हिंद फौज के सिपाही एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी साथी रहे गणेश राम अब नहीं रहे। महायोद्धावीर की उपाधि से सम्मानित 108 वर्षीय गणेश राम का बुधवार दोपहर 3 बजे उनके पैतृक गांव हिमाचल के जिला कांगड़ा के बरडां में निधन हो गया।
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वीरवार को उनकी पार्थिव देह का गांव के श्मशानघाट में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन के साथ पूरा प्रदेश शोक में डूब गया है। गणेश राम ऐसे व्यक्ति थे जो सुभाष चंद्र बोस की हर लड़ाई में शामिल हुए थे।

नूरपुर उपमंडल की बरडां ग्राम पंचायत में 2 मार्च 1907 को जन्मे गणेश राम में बचपन से ही देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। उन्होंने 1931 में हिटलर शाही के खिलाफ मित्र राष्ट्रों के भारतीय सेना दल में भर्ती होकर द्वितीय विश्व युद्ध में भी भाग लिया था।
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नेताजी के साथ गए थे जेल

कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद अंग्रेजी भाषा लिखना व बोलना वह बखूबी जानते थे। आजादी की लड़ाई के दौरान अनेकों बार नेता जी व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ उन्हें जेल यात्राएं करनी पड़ीं।

इसी दौरान गणेश राम ने आजाद हिंद फौज में बतौर सिपाही भर्ती होकर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। 1995 में गणेश राम को महायोद्धावीर की उपाधि से सम्मानित किया था। उनके चार बेटों में से तीन ने भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दी हैं।

पोते करतार सिंह ने बताया कि जीवन के 108 वसंत देख चुके उनके दादा इतनी आयु होने के बावजूद रोजाना पांच से छह किलोमीटर तक सैर करते थे।
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सुभाष चंद्र बोस के थे करीबी

ऐसा माना जाता है कि गणेश राम सुभाष चंद्र बोस के काफी करीबी थे। हिमाचल में भी उन्होंने ही आजादी की लड़ाई के लिए जज्बा पैदा किया था। वह गांधी जी के साथ भी आंदोलन में शामिल रहे थे।

गणेश राम देश से इतना प्यार करते थे कि उनहोंने अपने तीन बेटों को भी इंडियन आर्मी में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। आज उनके ये तीनों बेटे भारतीय सेना में हैं।

गांव के लोग बताते हैं कि गणेश राव खुद को आजादी का सिपाही मानते थे। वे अक्सर आजादी की लड़ाई से जुड़े किस्से भी लोगों को बताते थे।
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