बेटी बोली- रोज आता था पिता का फोन, लेकिन मंगलवार
संदीप अवस्थी असम राइफल्स की 24वीं बटालियन में सेवारत थे। वह 1992 में बतौर राइफलमैन भर्ती हुए थे। संदीप की पत्नी सरकारी स्कूल में अध्यापिका हैं तथा उनकी एक बेटी है। गुरुवार को नायक सूबेदार परसराम ने जब उनकी बेटी सुधांशी को तिरंगा सौंपा तो वह जोर-जोर से अपने पापा को पुकारने लगी, जिससे वहां पर मौजूद हर किसी की आंखों से आंसू निकल आए। उनके अंतिम संस्कार के मौके पर देहरा विधानसभा क्षेत्र की विधायक कमलेश ठाकुर भी मौके पर मौजूद रहीं और उन्होंने बेटी और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।बेटी सुधांशी शर्मा ने कहा कि पिता 10 से 15 दिन पहले डेढ़ महीने की छुट्टी काट कर गए थे और रोज उनका फोन आता था। लेकिन मंगलवार को जब फोन आया तो उन्होंने बात नहीं की, बल्कि सेना के अधिकारी ने बात की और उनके देहांत की सूचना दी।