विशिष्ट अतिथि प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हंसराज ने कहा कि समाज शास्त्र को सभी विषयों की जननी कहा जाता है। बच्चों के सर्वांगीण विकास और राष्ट्र निर्माण एवं समाज में उनका योगदान सुनिश्चित करने को स्कूली पाठ्यक्रम में समाज शास्त्र का समावेश किया जाना आवश्यक है।
कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल डिग्रियां हासिल करना नहीं होता है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें समाज के साथ जोड़ना तथा उन्हें संस्कारित शिक्षा देना भी आवश्यक है। नई शिक्षा नीति में इन सभी पहलुओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्राचार्य डॉ. अंजू बत्ता सहगल ने शिक्षा मंत्री, विधानसभा उपाध्यक्ष और अन्य अतिथियों का स्वागत किया।