सरकार ने व्यक्तिगत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्कूल शिक्षा संहिता के पैरा 2.32 (बी) में संशोधन किया है। विभाग के मुताबिक, मोबाइल फोन का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग छात्रों की एकाग्रता, अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल गंभीर स्वास्थ्य या सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों में ही छात्र को मोबाइल लाने की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए अभिभावक को लिखित अनुरोध देना होगा और अनुमति स्कूल के प्रधानाचार्य या संस्थान प्रमुख की ओर से दी जाएगी। ऐसी स्थिति में भी छात्र मोबाइल अपने पास नहीं रख सकेगा, बल्कि निर्धारित स्थान पर जमा कराना होगा और केवल वहीं से कॉल करने की अनुमति मिलेगी।
आर्थिक दंड लगाने का भी किया प्रावधान
यदि किसी छात्र के पास मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलता है, तो उस पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बार-बार उल्लंघन की स्थिति में निष्कासन तक का प्रावधान रखा गया है। स्कूल प्रबंधन समिति की सहमति से आर्थिक दंड लगाने की व्यवस्था भी की जा सकेगी।
शिक्षकों के लिए भी सख्त किए गए नियम
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए भी सख्त नियम तय किए हैं। कक्षा शिक्षण, प्रयोगशाला कार्य, परीक्षाओं या किसी भी शैक्षणिक गतिविधि के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। शैक्षणिक कार्य, आधिकारिक एप्स, डिजिटल कंटेंट, उपस्थिति या आपात स्थिति में ही सीमित उपयोग की अनुमति होगी। सोशल मीडिया, गेमिंग, मनोरंजन या गैर-शैक्षणिक वीडियो-ऑडियो देखने पर पूरी तरह रोक रहेगी। फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग बिना अनुमति नहीं की जा सकेगी। नियमों के पालन की जिम्मेदारी स्कूल के प्रधानाचार्य या संस्थान प्रमुख की होगी। यदि स्कूल प्रमुख कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।