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गुना-भाग और विज्ञान में पिछड़े दसवीं के विद्यार्थी, सर्वे में खुलासा

Sat, 17 Nov 2018 10:13 AM IST
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी गणित, विज्ञान और अंग्रेजी में बुरी तरह पिछड़ रहे हैं। एनसीईआरटी के नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2017-18 में यह खुलासा हुआ है।

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विद्यार्थियों का दसवीं की परीक्षा में गणित और विज्ञान विषय में 30 और अंग्रेजी में 32 फीसदी ही परिणाम रहा है।सामाजिक विज्ञान में भी विद्यार्थी फिसड्डी ही साबित हुए हैं। हिंदी विषय को छोड़कर अन्य सभी विषयों में हिमाचल का परीक्षा परिणाम राष्ट्रीय औसत से कम रहा है।

गणित में 79, विज्ञान में 74 और अंग्रेजी में 70 फीसदी विद्यार्थियों के अंक शून्य से 35 प्रतिशत के बीच आए हैं। सामाजिक विज्ञान में 44 और हिंदी में 22 फीसदी विद्यार्थियाें के अंक 35 प्रतिशत से कम हैं।
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गणित में 16, विज्ञान में 22, सामाजिक विज्ञान में 43, अंग्रेजी में 21 और हिंदी में 27 फीसदी छात्रों के अंक 36 से 50 प्रतिशत के बीच हैं। गणित में चार फीसदी, विज्ञान में 3, सामाजिक विज्ञान में 12, अंग्रेजी में आठ और हिंदी में 43 फीसदी विद्यार्थी ऐसे हैं, जो 51 से 75 प्रतिशत तक अंक ले पाए हैं।

811 स्कूलों के 24 हजार विद्यार्थियों ने दी थी परीक्षा

एनसीईआरटी के नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2017-18 के दूसरे चरण के तहत हिमाचल के 811 स्कूलों में परीक्षा हुई। 24297 विद्यार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया था। स्कूल शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के स्कूलों में परीक्षा का आयोजन हुआ था।

सिर्फ एक फीसदी ने लिए 76 से सौ प्रतिशत के बीच अंक
गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी विषय में सिर्फ एक-एक फीसदी विद्यार्थियों के अंक 76 से 100 प्रतिशत के बीच हैं। हिंदी में आठ फीसदी विद्यार्थियों के 76 फीसदी से अधिक अंक हैं।
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ऊना, कुल्लू, सिरमौर, चंबा के परिणाम राज्य औसत से कम

चार जिलों ऊना, कुल्लू, सिरमौर और चंबा के परिणाम राज्य औसत से भी कम हैं। शिमला, मंडी, किन्नौर, कांगड़ा और बिलासपुर के परिणाम राज्य औसत के बराबर हैं। सोलन, हमीरपुर और लाहौल-स्पीति के परिणाम राज्य औसत से अधिक हैं।

सर्वे से सामने आईं कमियों को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस सर्वे से कई तथ्य सामने आए हैं। ऐसे नतीजे दोबारा न आएं, इसके लिए शिक्षक संगठनों से चर्चा की जा रही है। शिक्षकों की जवाबदेही भी तय की जा रही है।- डॉ. अरुण कुमार शर्मा, शिक्षा सचिव, हिमाचल सरकार
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